UGC Regulations 2026: यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। खासतौर पर जनरल कैटेगरी के छात्रों द्वारा किए गए व्यापक विरोध के बीच अदालत ने इन नियमों को दोबारा समीक्षा करने का निर्देश दिया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि नियमों में “पूरी तरह अस्पष्टता” है, जिससे इनके दुरुपयोग की आशंका बनती है।
सुनवाई के दौरान CJI सूर्य कांत ने कहा कि आज़ादी के 75 साल बाद भी समाज जातिगत भेदभाव से पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाया है।
उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा,
“75 साल बाद भी अगर हम वर्गहीन समाज नहीं बना पाए, तो क्या हम एक प्रतिगामी समाज बनते जा रहे हैं? रैगिंग की सबसे बुरी बात यह है कि दक्षिण या उत्तर-पूर्व से आने वाले बच्चे अपनी संस्कृति लेकर आते हैं और जो उनसे अलग होता है, वह उन पर टिप्पणी करने लगता है। फिर अलग हॉस्टल की बात की जाती है — भगवान के लिए! अंतरजातीय शादियां भी होती हैं और हम भी हॉस्टल में साथ रहे हैं।”

UGC के नए नियमों पर कोर्ट की आपत्ति
अदालत ने कहा कि इन नियमों की भाषा की किसी विशेषज्ञ द्वारा समीक्षा कराई जानी चाहिए। इसके साथ ही केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी किया गया।
पीठ ने यह भी कहा कि संविधान का अनुच्छेद 15(4) अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए कानून बनाने की अनुमति देता है, लेकिन जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने जोर दिया कि प्रगतिशील कानूनों में किसी तरह की पीछे हटने वाली सोच नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा,
“मुझे उम्मीद है कि हम अमेरिका की तरह अलग-अलग स्कूलों की ओर नहीं जाएंगे, जहां कभी अश्वेत और श्वेत बच्चों के लिए अलग स्कूल हुआ करते थे।”
इस पर CJI ने जोड़ा, “ऐसी स्थिति का दुरुपयोग किया जा सकता है।”
सुप्रीम कोर्ट UGC Regulations 2026 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। इन नियमों के तहत देश की सभी यूनिवर्सिटियों और कॉलेजों में Equal Opportunity Centre (EOC) और कैंपस स्तर की समितियां बनाने का प्रावधान था, जो भेदभाव की शिकायतों की जांच करेंगी और समानता को बढ़ावा देंगी।
इन नियमों को लेकर यह आरोप लगे कि इनमें जनरल कैटेगरी छात्रों के लिए शिकायत दर्ज कराने की स्पष्ट व्यवस्था नहीं है और इससे अनजाने में असमानता बढ़ सकती है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वकील विष्णु शंकर जैन ने दलील दी कि नियमों की धारा 3(c) में “जातिगत भेदभाव” को केवल SC, ST और OBC तक सीमित कर दिया गया है, जिससे जनरल कैटेगरी पूरी तरह बाहर हो जाती है।
उन्होंने कहा,
“हम धारा 3(c) को चुनौती दे रहे हैं। जब भेदभाव की परिभाषा पहले से मौजूद है, तो इसे सिर्फ एक वर्ग तक सीमित नहीं किया जा सकता। यह अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।”
UGC 2026 नियमों पर रोक लगने के बाद अब सभी
