नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में डायरेक्ट टैक्स सिस्टम में बड़े बदलावों का ऐलान किया है। नए इनकम टैक्स एक्ट, कम TCS दरों, आसान रिटर्न फाइलिंग और विदेशी संपत्तियों के लिए विशेष खुलासा विंडो जैसे कई सुधार पेश किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का मकसद टैक्स अनुपालन को सरल बनाना, नकदी पर बोझ कम करना और करदाताओं को गलतियां सुधारने के लिए ज्यादा समय देना है।
सबसे अहम घोषणा 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए आयकर अधिनियम (Income Tax Act 2026) को लेकर की गई है, जिसे मौजूदा टैक्स ढांचे को आधुनिक और सरल बनाने की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है।
रिटर्न फाइलिंग की नई समयसीमा
नए सिस्टम से पहले सरकार ने रिटर्न फाइलिंग की समयसीमा में भी बदलाव किए हैं:
- ITR-1 और ITR-2 दाखिल करने की अंतिम तारीख: 31 जुलाई (पहले की तरह)
- नॉन-ऑडिट बिजनेस केस और ट्रस्ट: 31 अगस्त तक रिटर्न फाइल कर सकेंगे
- रिवाइज्ड रिटर्न: अब हर साल 31 मार्च तक मामूली शुल्क के साथ दाखिल की जा सकेगी
- अपडेटेड रिटर्न: असेसमेंट शुरू होने के बाद भी 10% अतिरिक्त टैक्स के साथ रिटर्न अपडेट करने की अनुमति
इससे करदाताओं को गलतियां सुधारने के लिए ज्यादा समय मिलेगा।
विदेश यात्रा और शिक्षा पर TCS में बड़ी कटौती
आम लोगों के लिए सबसे बड़ी राहत विदेश यात्रा पैकेज पर TCS को लेकर आई है। अब इस पर फ्लैट 2% TCS लगेगा, वह भी बिना किसी थ्रेशहोल्ड के। पहले यह 5% और 20% तक था।
इसके अलावा, LRS (Liberalised Remittance Scheme) के तहत शिक्षा और मेडिकल खर्च के लिए भेजी जाने वाली रकम पर TCS को 5% से घटाकर 2% कर दिया गया है। इससे विदेश में पढ़ाई या इलाज कराने वाले परिवारों पर नकदी का दबाव कम होगा।
दुर्घटना पीड़ितों को बड़ी राहत
मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) द्वारा दी जाने वाली ब्याज राशि को अब पूरी तरह टैक्स-फ्री कर दिया गया है। इस पर कोई TDS भी नहीं कटेगा। इससे वर्षों से चली आ रही अस्पष्टता खत्म हो गई है।
छोटे निवेशकों के लिए आसान TDS व्यवस्था
अब CDSL और NSDL सीधे Form 15G/15H स्वीकार करेंगे और संबंधित कंपनियों को भेजेंगे, जिससे पात्र छोटे निवेशकों पर बेवजह TDS कटने से बचाव होगा।
विदेशी संपत्तियों के लिए वन-टाइम डिस्क्लोजर स्कीम
सरकार ने छात्रों, NRI और छोटे करदाताओं के लिए छह महीने की विशेष विदेशी संपत्ति खुलासा योजना की घोषणा की है:
- कैटेगरी A: ₹1 करोड़ तक की अघोषित विदेशी संपत्ति — कुल 60% टैक्स व पेनल्टी
- कैटेगरी B: पहले घोषित आय लेकिन रिपोर्ट न की गई संपत्ति (₹5 करोड़ तक) — केवल ₹1 लाख फीस
दोनों कैटेगरी में अभियोजन और अतिरिक्त दंड से छूट मिलेगी।
विवाद निपटारे और अनुपालन में सुधार
- असेसमेंट और पेनल्टी प्रोसीडिंग को एकीकृत किया जाएगा, जिससे मामलों का तेजी से निपटारा हो सके
- टैक्स डिमांड पर स्टे के लिए प्री-डिपॉजिट 20% से घटाकर 10% कर दिया गया है
- बहीखाते पेश न करने जैसे छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाकर जुर्माने में बदला जाएगा
विशेषज्ञों का मानना है कि बजट 2026 में छोटे करदाताओं पर खास फोकस किया गया है। कम TCS, लंबी समयसीमा और विदेशी संपत्ति खुलासा जैसे कदम टैक्स सिस्टम को ज्यादा व्यावहारिक और करदाता-अनुकूल बनाएंगे।
कुल मिलाकर, नया टैक्स फ्रेमवर्क 1 अप्रैल 2026 से लागू होने के बाद भारत के प्रत्यक्ष कर ढांचे में एक बड़े बदलाव की शुरुआत करेगा, जिससे आम नागरिकों और निवेशकों दोनों को राहत मिलने की उम्मीद है।
