Gold Silver Price:
सोना, चांदी और कॉपर (तांबा) की कीमतों में हाल के दिनों में जिस तरह का बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, उसने निवेशकों और आम लोगों को असमंजस में डाल दिया है। साल 2025 में सोने ने करीब 70%, चांदी ने 170% और कॉपर ने 50% से ज्यादा का रिटर्न दिया था। 2026 की शुरुआत में भी तेजी बनी हुई थी, लेकिन फरवरी की शुरुआत होते ही बाजार में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली।
जिस चांदी को 2 लाख से 4 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंचने में करीब डेढ़ महीना लगा था, वही चांदी कुछ ही दिनों में बड़ी गिरावट का शिकार हो गई।
8 दिनों में कीमतों का बड़ा उलटफेर
29 जनवरी 2026 को सोना प्रति ग्राम 1.93 लाख रुपये और चांदी प्रति किलो 4.20 लाख रुपये के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंच गई थी। लेकिन उसी रात से गिरावट शुरू हो गई और सिर्फ 8 दिनों में हालात पूरी तरह बदल गए।
फिलहाल सोना अपने उच्च स्तर से करीब 23% गिरकर लगभग 1.55 लाख रुपये और चांदी करीब 46% टूटकर 2.49 लाख रुपये के आसपास ट्रेड कर रही है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।

सोना-चांदी में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई?
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक इस तेज गिरावट के पीछे मुख्य रूप से तीन कारण हैं:
- निवेशकों द्वारा बड़े पैमाने पर प्रॉफिट बुकिंग
- अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना और फेडरल रिजर्व के नए प्रमुख की नियुक्ति
- MCX द्वारा कीमती धातुओं के कॉन्ट्रैक्ट पर मार्जिन बढ़ाना
डॉलर मजबूत होने से अन्य देशों के लिए सोना-चांदी खरीदना महंगा हो गया है, जिससे मांग पर असर पड़ा है।
निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?
एक्सपर्ट्स और JP Morgan जैसे निवेश बैंकों का मानना है कि चांदी के ऊंचे वैल्यूएशन के चलते शॉर्ट टर्म में अस्थिरता बनी रह सकती है, लेकिन लॉन्ग टर्म में इसकी डिमांड मजबूत रहेगी।
निवेशकों को सलाह दी गई है कि एकमुश्त निवेश करने के बजाय SIP के जरिए चरणबद्ध निवेश करें। पृथ्वी फिनमार्ट के मनोज कुमार जैन का कहना है कि बाजार में स्थिरता आने तक जल्दबाजी में खरीदारी से बचना चाहिए।
