रत्न कारीगरों में खुशी की लहर! जेम्स-डायमंड पर 0% टैरिफ से गुजरात के हीरा बाजारों में फिर रौनक

Gujarat Diamond Market:
भारतीय हीरा उद्योग और खासतौर पर गुजरात के लाखों रत्न कारीगरों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से भारतीय हीरा और रत्न उद्योग को सबसे अधिक फायदा हुआ है। दोनों देशों के बीच हुई एक अहम अंतरिम व्यापारिक सहमति के तहत अब अमेरिका को निर्यात होने वाले भारतीय रत्न और हीरों पर शून्य प्रतिशत (0%) टैरिफ लगाया जाएगा।

इस ऐलान के बाद पिछले कुछ समय से मंदी का सामना कर रहे हीरा बाजारों में दोबारा रौनक लौटने की उम्मीद जगी है।

एक साल की मेहनत के बाद मिली बड़ी सफलता

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार (7 फरवरी) देर रात अमेरिका ने इस ऐतिहासिक समझौते के फ्रेमवर्क को मंजूरी दी। इस बारे में जानकारी देते हुए केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि, “दोनों देशों के बीच पिछले एक साल से चल रही बातचीत अब सफल नतीजे तक पहुंच गई है।”

केंद्रीय मंत्री के अनुसार यह समझौता अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत देगा। अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर 50 प्रतिशत पारस्परिक टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है और कई उत्पादों पर शून्य ड्यूटी लगाने का फैसला किया है।

इससे रत्न और हीरे, फार्मास्युटिकल उत्पाद, स्मार्टफोन, मसाले, चाय, कॉफी, नारियल, काजू, फल और सब्जियों जैसे कई कृषि उत्पादों के निर्यात में बढ़ोतरी होगी।

गुजरात के हीरा उद्योग को क्या होगा फायदा?

अब भारत से अमेरिका निर्यात होने वाले सभी हीरे, हीरे के आभूषण और कीमती पत्थरों पर 0% टैरिफ लगेगा, यानी अमेरिका में इन पर कोई टैक्स नहीं देना होगा। इससे सूरत के हीरा हब और जयपुर के रत्न व कीमती पत्थरों के हब को बड़ा फायदा मिलेगा।

गुजरात, खासकर सूरत, दुनिया के 80 प्रतिशत से अधिक हीरों की कटिंग और पॉलिशिंग करता है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। टैरिफ शून्य होने से भारतीय हीरे अमेरिका में सस्ते होंगे, जिससे मांग बढ़ेगी।

मंदी से जूझ रहे लाखों रत्न कारीगरों के लिए काम के घंटे और वेतन में सुधार की उम्मीद है। अन्य देशों की तुलना में भारतीय हीरा उद्योग अमेरिकी बाजार में और मजबूत होगा। जैसे ही यह खबर सूरत और भावनगर के हीरा बाजारों में फैली, रत्न कारीगरों और व्यापारियों में खुशी का माहौल देखने को मिला।

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