अहमदाबाद में ED के छापे: अवैध कॉल सेंटरों के 6 ठिकानों पर कार्रवाई, क्रिप्टो-हवाला का बड़ा घोटाला

अहमदाबाद: शहर में चल रहे अवैध कॉल सेंटर घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हैदराबाद जोनल ऑफिस ने अहमदाबाद के छह अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर जांच शुरू की है।

ईडी की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपी खुद को अमेरिकी सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर विदेशी नागरिकों को डराते थे और उनसे बड़ी रकम की वसूली करते थे। यह रकम डिजिटल पेमेंट के जरिए ली जाती थी। जांच में सामने आया है कि वसूली गई रकम को पहले क्रिप्टोकरेंसी में बदला जाता था और फिर हवाला ऑपरेटरों व अवैध चैनलों के जरिए नकद में बदल दिया जाता था।

मुख्य आरोपी गिरफ्तार, नकदी और क्रिप्टो जब्त

ईडी की कार्रवाई के दौरान मुख्य आरोपियों में से एक आकीब घांची के पास से करीब 12,000 अमेरिकी डॉलर मूल्य की क्रिप्टोकरेंसी और ₹13.50 लाख से अधिक की नकद राशि बरामद की गई है, जिसे जब्त कर लिया गया है। इसके अलावा, महत्वपूर्ण डेटा से जुड़े कई दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी ईडी ने कब्जे में लिए हैं।

डिजिटल सबूत और बैंक खाते फ्रीज

घोटाले की जड़ तक पहुंचने के लिए ईडी ने आरोपियों और उनसे जुड़ी संस्थाओं के 31 बैंक खाते और बैंक लॉकर फ्रीज कर दिए हैं। ईडी की इस सख्त कार्रवाई से अवैध कॉल सेंटर संचालकों में हड़कंप मच गया है।

अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर घोटाले का पर्दाफाश

ईडी की जांच में सामने आया है कि यह मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क मोहम्मद अंसारी (उर्फ इरफान अंसारी), आकीब गुलामरसूल घांची, विकास केनीमार, दिव्यांग रावल, प्रदीप वी. राठोड़ और उनके सहयोगियों द्वारा संचालित किया जा रहा था।

घोटाले की कार्यप्रणाली

अहमदाबाद में पकड़े गए ये अवैध कॉल सेंटर आधुनिक तकनीकी ढांचे, प्रशिक्षित स्टाफ और तय कॉल स्क्रिप्ट्स के जरिए संचालित होते थे। कॉल सेंटर के ऑपरेटर खुद को अमेरिकी सरकारी अधिकारी या किसी प्रतिष्ठित कंपनी का प्रतिनिधि बताकर विदेशी नागरिकों को फोन करते थे।

पीड़ितों को टैक्स बकाया, लोन या कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर डराया जाता था और मामले को सुलझाने के नाम पर अमेज़न गिफ्ट कार्ड या डिजिटल पेमेंट करने के लिए मजबूर किया जाता था।

मनी लॉन्डरिंग और क्रिप्टो ट्रांजैक्शन

वसूली गई रकम को पहले गिफ्ट कार्ड के जरिए रिडीम किया जाता और फिर पकड़े जाने के डर से इसे बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी में बदला जाता था। इसके बाद Paxful जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और अन्य अवैध माध्यमों से इसे नकद में बदला जाता था, ताकि पैसे के असली स्रोत को छिपाया जा सके।

अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन और निवेश की जांच

ईडी की जांच में विदेशी नागरिकों की संलिप्तता भी सामने आई है। इसके अलावा, लूटी गई रकम का बड़ा हिस्सा भारतीय बैंकिंग चैनलों से होकर गुजरा है। आरोपियों ने इस अवैध कमाई से अपने, परिवार के सदस्यों और बेनामी लोगों के नाम पर बड़ी मात्रा में चल-अचल संपत्तियां भी बनाई थीं। इन निवेशों की जांच अब ईडी द्वारा की जा रही है।

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