USA and Donald Trump News: कहावत है – हाथ के किए हृदय पर लगते हैं। मौजूदा हालात में यह कहावत अमेरिका पर बिल्कुल फिट बैठती दिख रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की आर्थिक नीतियों का असर अब अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर साफ नजर आने लगा है। ट्रम्प के सत्ता में आने के एक साल के भीतर ही अर्थव्यवस्था में मंदी के संकेत दिखने लगे हैं। 2020 के कोविड काल को छोड़ दें तो रोजगार वृद्धि दर 13 वर्षों के निचले स्तर 3.3% पर पहुंच गई है।
इसके उलट बेरोजगारी दर बढ़कर 4.4% हो गई है। वर्ष 2025 में पूरे साल में केवल 5.84 लाख नई नौकरियां जुड़ीं, जबकि पिछले दशक में औसत वार्षिक रोजगार वृद्धि करीब 20 लाख रही थी। दो साल पहले तक हर साल लगभग 20 लाख लोगों को नौकरी मिल रही थी, वहीं 2022 में तो 40 लाख से अधिक भर्तियां हुई थीं। यह दर्शाता है कि मौजूदा हालात में अमेरिका रोजगार सृजन में नहीं बल्कि बेरोजगारी बढ़ाने में आगे बढ़ता दिख रहा है। पिछले वर्ष की जॉब ग्रोथ ऐतिहासिक औसत का केवल 30% रही।

माना जा रहा है कि फिलहाल 75 लाख से अधिक अमेरिकी बेरोजगार हैं। हालांकि अमेरिका अभी आधिकारिक रूप से मंदी में नहीं गया है, लेकिन मौजूदा आंकड़े मंदी की आहट जरूर दे रहे हैं। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि देश में “लो हायरिंग और लो फायरिंग” की स्थिति है। कई अर्थशास्त्रियों के अनुसार 2026 तक अमेरिका के मंदी में जाने की संभावना 35% से 45% के बीच है। ट्रम्प की नीतियों के कारण उद्योग जगत और कामगार वर्ग में अनिश्चितता बढ़ गई है। कंपनियां नए निवेश से बच रही हैं, और जो निवेश हो भी रहा है वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में हो रहा है, जहां बड़े पैमाने पर भर्ती की जरूरत नहीं होती। टैरिफ नीतियों के कारण औसत अमेरिकी परिवार का बजट 1800 से 2000 डॉलर तक बढ़ गया है।
बेरोजगारी के आंकड़े धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं और कई विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक स्थिति आधिकारिक आंकड़ों से भी ज्यादा गंभीर हो सकती है।
निजी क्षेत्र में नौकरी के अवसर आधे हुए
निजी क्षेत्र में जॉब ओपनिंग घटकर 65 लाख रह गई है, जो कुछ वर्ष पहले 1.2 करोड़ थी। वेतन वृद्धि ठप हो गई है और उपभोक्ता खर्च में कमी आई है। इसका असर कंज्यूमर सेक्टर समेत कई उद्योगों पर पड़ रहा है। कंपनियां विस्तार की बजाय केवल टिके रहने पर ध्यान दे रही हैं।
