23 जनवरी (रॉयटर्स) – भारत के अडानी समूह की कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में शुक्रवार को करीब 12.5 अरब डॉलर की भारी गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट तब आई जब अमेरिका की बाजार नियामक संस्था सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने अदालत से अनुमति मांगी कि वह समूह के संस्थापक गौतम अडानी और वरिष्ठ अधिकारी सागर अडानी को कथित धोखाधड़ी और 265 मिलियन डॉलर की रिश्वत योजना के मामले में व्यक्तिगत रूप से ईमेल के जरिए समन भेज सके।
रॉयटर्स ने गुरुवार को, भारतीय बाजार बंद होने के बाद, इस SEC फाइलिंग की जानकारी दी थी।
शुक्रवार को अडानी समूह की प्रमुख कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज (Adani Enterprises) भारत के बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 50 में सबसे ज्यादा प्रतिशत नुकसान उठाने वाली कंपनी रही। इसके शेयर 10.65% गिरकर 1,864.2 रुपये पर बंद हुए, जबकि निफ्टी 0.95% की गिरावट के साथ बंद हुआ।
अडानी समूह की विभिन्न कंपनियों के शेयरों में 3.4% से लेकर 14.54% तक की गिरावट दर्ज की गई।

नवंबर 2024 में सार्वजनिक हुए अमेरिकी अभियोग (इंडिक्टमेंट) में आरोप लगाया गया है कि अडानी समूह के अधिकारी एक ऐसी योजना का हिस्सा थे, जिसके तहत अडानी ग्रीन एनर्जी द्वारा उत्पादित बिजली की खरीद सुनिश्चित करने के लिए भारतीय अधिकारियों को रिश्वत दी गई।
अमेरिकी कानून के तहत, वे विदेशी कंपनियां जो अमेरिकी निवेशकों से पूंजी जुटाती हैं, उन्हें विदेशों में व्यापार हासिल करने के लिए रिश्वत देने की अनुमति नहीं है। इसके अलावा, झूठे या भ्रामक बयानों के आधार पर निवेश मांगना भी कानूनन प्रतिबंधित है।
फाइलिंग के अनुसार, भारत सरकार पहले ही दो बार ऐसे समनों को भेजने के SEC के अनुरोध को खारिज कर चुकी है, जिन्हें नियामक संस्था पिछले वर्ष से भेजने का प्रयास कर रही थी।
अडानी समूह ने इन आरोपों को “बेबुनियाद” बताया है और कहा है कि वह अपने बचाव के लिए “सभी संभव कानूनी विकल्पों” का सहारा लेगा। 21 जनवरी की तारीख वाली ताजा SEC फाइलिंग पर समूह की ओर से रॉयटर्स के सवालों का तत्काल कोई जवाब नहीं मिला।
स्वतंत्र बाजार विश्लेषक अम्बरीश बलीगा ने कहा, “बाजार के प्रतिभागियों को लग रहा था कि अब कुछ लंबित नहीं है और समूह को क्लीन चिट मिल चुकी है, इसलिए SEC की यह फाइलिंग अचानक सामने आई है।”
उन्होंने आगे कहा कि अगले कदमों की कोई स्पष्ट समय-सीमा न होने के कारण यह मामला कम से कम अगले दो हफ्तों तक खिंच सकता है, खासकर ऐसे समय में जब बाजार की समग्र धारणा पहले से ही कमजोर बनी हुई है।
