Ahmedabad में नकली नोट छापने वाले बड़े रैकेट का खुलासा होने के बाद क्राइम ब्रांच ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चौंकाने वाली जानकारी दी है। मुख्य आरोपी मुकेश ठुम्मर और प्रदीप जोटांगिया की गिरफ्तारी के बाद सामने आया है कि यह गिरोह आधुनिक तकनीक और विदेशी कनेक्शन के जरिए देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहा था।
💰 नकली नोट कारोबार में 50% हिस्सेदारी
जांच में पता चला कि प्रदीप जोटांगिया का “योग फाउंडेशन” 2020 के बाद सक्रिय नहीं था और बैंक खाते में भी बहुत कम लेनदेन था।
इसके बावजूद नकली नोट के कारोबार में प्रदीप 50% हिस्सेदार था, जबकि बाकी हिस्सा अन्य आरोपियों में बंटता था।
प्रदीप अपने अनुयायियों से मिलने वाले दान का उपयोग निजी शौक पूरे करने में करता था। उसने थार, फॉर्च्यूनर और वैगन-आर जैसी लग्जरी कारें खरीदी थीं।
🌏 चीन कनेक्शन और हाईटेक तकनीक
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 2 फरवरी को प्रदीप China गया था, जहां उसने उच्च गुणवत्ता वाले प्रिंटिंग पेपर और एजेंट्स से संपर्क किया।
पुलिस को उसके लैपटॉप से एक खास एप्लिकेशन भी मिली है, जिसका इस्तेमाल केवल नकली नोट छापने के लिए किया जाता था।
अब तक उसने हवाला के जरिए करीब ₹17 लाख China भेजे होने का खुलासा हुआ है।
💸 बाजार में फैली नकली करेंसी
यह गिरोह ₹1 लाख असली के बदले ₹3 लाख नकली नोट देता था।
जांच में सामने आया कि:
- ₹10 लाख के नकली नोट का हिसाब नहीं मिला
- ₹5 लाख के नोट छपाई में खराब हो गए
- करीब ₹5 लाख के नकली नोट बाजार में पहले ही चलन में आ चुके हैं
क्राइम ब्रांच अब इन नोटों की ट्रेसिंग और नेटवर्क की जांच तेज कर रही है।
