हीरा उद्योग को तालुका व अर्ध-ग्रामीण क्षेत्रों तक ले जाने की बजट में मांग

औद्योगिक क्लस्टर, इंटरनेट कनेक्टिविटी, परिवहन सुविधा और सस्ती बिजली के लिए मुख्यमंत्री को पत्र

(प्रतिनिधि द्वारा)

केंद्र सरकार के बजट के बाद अब गुजरात सरकार के आगामी बजट की तैयारियां तेज़ी से चल रही हैं। ऐसे में सूरत डायमंड एसोसिएशन ने राज्य के बजट में हीरा उद्योग को तालुका और अर्ध-ग्रामीण क्षेत्रों तक विस्तार देने के लिए विशेष प्रावधान करने की मांग की है। संगठन ने औद्योगिक क्लस्टर के विकास, बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी, परिवहन सुविधाएं और रियायती दरों पर बिजली उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

सूरत डायमंड एसोसिएशन ने इस संबंध में राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को एक पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि वर्तमान में हीरा उद्योग के कारखाने सूरत, अहमदाबाद, भावनगर, नवसारी, बोटाद और अमरेली जैसे शहरों में केंद्रित हैं, जिसके कारण शहरीकरण तेज़ी से बढ़ रहा है।

इस बढ़ते शहरीकरण का असर आवास, यातायात, जल आपूर्ति, बिजली और परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाओं पर पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर, ग्रामीण क्षेत्रों का विकास बाधित हो रहा है और रोजगार के लिए गांवों से शहरों की ओर पलायन बढ़ता जा रहा है।

एसोसिएशन ने मांग की है कि आगामी राज्य बजट में हीरा उद्योग को तालुका और अर्ध-ग्रामीण स्तर तक ले जाने के लिए तालुका स्तर पर औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जाएं, इंटरनेट कनेक्टिविटी और परिवहन सुविधाएं बढ़ाई जाएं, हीरा प्रशिक्षण और कौशल विकास केंद्र खोले जाएं, रियायती दरों पर बिजली और सब्सिडी प्रदान की जाए, तथा अनुमतियों की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए

संगठन का मानना है कि इन उपायों से ग्रामीण क्षेत्रों से होने वाला पलायन रुकेगा, परिवारों की स्थिरता बनी रहेगी और गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

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