30 जनवरी को ट्रेडिंग के दौरान गोल्ड और सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में भारी गिरावट देखने को मिली, क्योंकि रिकॉर्ड तेजी के बाद कीमती धातुओं की कीमतों में तेज करेक्शन आया।
MCX पर अप्रैल एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर करीब 5 फीसदी गिरकर ₹1,75,100 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। एक दिन पहले ही यह कॉन्ट्रैक्ट ₹1,93,096 प्रति 10 ग्राम के लाइफटाइम हाई पर पहुंचा था। फरवरी और जून एक्सपायरी वाले गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट्स भी शुरुआती कारोबार में करीब 6 फीसदी टूटे।
वहीं मार्च एक्सपायरी वाला सिल्वर फ्यूचर करीब 6 फीसदी गिरकर ₹3,75,900 प्रति किलो पर ट्रेड करता दिखा। मई और जुलाई एक्सपायरी वाले कॉन्ट्रैक्ट्स में भी लगभग 6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
Nippon India ETF Gold BeES, जिसने बीते एक साल में 104 फीसदी का रिटर्न दिया था, करीब 10 फीसदी टूटकर ₹132 पर आ गया। ICICI Prudential Gold ETF में भी लगभग 10 फीसदी की गिरावट आई, जबकि Axis Gold ETF करीब 9 फीसदी फिसला।

UTI Gold ETF, Edelweiss Gold ETF, HDFC Gold ETF, Quantum Gold ETF और DSP Gold ETF समेत कई अन्य गोल्ड ETFs में भी तेज गिरावट देखी गई।
सिल्वर ETFs की बात करें तो Mirae Asset Silver ETF करीब 13 फीसदी गिरा, जबकि Motilal Oswal Silver ETF लगभग 12.5 फीसदी टूटकर ₹330.01 पर आ गया। HDFC Silver ETF और Nippon India Silver ETF में 14 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
इसके अलावा Aditya Birla Sun Life Silver ETF, Groww Silver ETF, ICICI Prudential Silver ETF, Axis Silver ETF, UTI Silver ETF, Tata Silver ETF और Kotak Silver ETF भी तेज दबाव में रहे।
आज सोना-चांदी क्यों गिरे?
वैश्विक बाजारों में सोना-चांदी की कीमतों में आई तेज गिरावट की मुख्य वजह यह अटकलें हैं कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व को जल्द एक ज्यादा “हॉकीश” चेयर मिल सकता है। शुक्रवार को स्पॉट गोल्ड करीब 5 फीसदी गिरा, जबकि एक दिन पहले ही यह $5,594.82 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वे शुक्रवार को फेड चेयर जेरोम पॉवेल के उत्तराधिकारी के नाम की घोषणा करेंगे। इससे बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है।
रॉयटर्स के मुताबिक KCM के चीफ ट्रेड एनालिस्ट टिम वॉटरर ने कहा कि संभावित सख्त रुख वाले फेड चेयर, डॉलर में मजबूती और ओवरबॉट स्थिति के चलते सोने पर दबाव बना है।
StoneX के सीनियर एनालिस्ट मैट सिम्पसन ने कहा कि केविन वार्श के फेड चेयर बनने की अफवाहों ने एशियाई बाजार में सोने की कीमतों को नीचे धकेला।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स की एसोसिएट डायरेक्टर तन्वी कंचन के मुताबिक, बाजार दो हिस्सों में बंटा है — कुछ निवेशक इसे खरीदारी का मौका मान रहे हैं, जबकि कुछ ओवरहीटेड कंडीशंस को लेकर सतर्क हैं। उन्होंने कहा कि सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल और AI इंफ्रास्ट्रक्चर से मजबूत औद्योगिक मांग अब भी कीमती धातुओं को सपोर्ट दे रही है।
हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि 2025 की तेज रैली के बाद एक साथ निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। बेहतर होगा कि निवेशक अगले कुछ हफ्तों या महीनों में चरणबद्ध तरीके से निवेश करें।
कंजर्वेटिव निवेशकों के लिए विशेषज्ञों की सलाह है कि वे अपने पोर्टफोलियो का 5–10 फीसदी हिस्सा सिस्टमेटिक तरीके से गोल्ड और सिल्वर ETFs में लगाएं, जिससे टाइमिंग रिस्क कम हो और जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितता से बचाव भी बना रहे।
VT Market के खू के अनुसार, सेंट्रल बैंक की खरीद, लंबी अवधि की मांग और महंगाई से बचाव जैसे स्ट्रक्चरल फैक्टर्स अब भी मजबूत हैं, इसलिए यह करेक्शन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए रणनीतिक जमा (accumulation) का मौका हो सकता है।
बोनान्ज़ा के सीनियर कमोडिटी रिसर्च एनालिस्ट निरपेन्द्र यादव ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं और नरम ब्याज दरों की उम्मीदों के बीच सोना अब भी पोर्टफोलियो हेजिंग और डाइवर्सिफिकेशन के लिए अहम बना हुआ है।
