- आईपीओ की संख्या और निवेशकों के आकर्षण में पिछले साल की तुलना में उल्लेखनीय गिरावट
- नए साल में अब तक केवल पांच ही इश्यू बाजार में आए
Mumbai : वर्ष 2025 में रिकॉर्ड प्रदर्शन के बाद 2026 की शुरुआत में देश का प्राइमरी मार्केट धीमा पड़ता नजर आ रहा है। साल के पहले दो महीनों में आईपीओ की संख्या काफी कम रही है, वहीं निवेशकों की ओर से आवेदन भी पिछले साल की तुलना में काफी कम स्तर पर पहुंच गए हैं।
पिछले वर्ष देश में कुल 373 आईपीओ आए थे, जिनमें 103 मेनबोर्ड और 270 एसएमई इश्यू शामिल थे। इन आईपीओ के जरिए कंपनियों ने कुल लगभग ₹1.95 ट्रिलियन की पूंजी जुटाई थी।
2025 में बाजार की तेज़ रैली का फायदा उठाते हुए कंपनियों ने ऊंचे वैल्यूएशन पर भारी निवेश जुटाया था। लेकिन 2026 में अब तक ऐसी स्थिति देखने को नहीं मिली है। इस वर्ष अभी तक केवल पांच मेनबोर्ड आईपीओ ही आए हैं, जबकि चार और निकट भविष्य में आने की उम्मीद है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, निवेशकों की प्राइमरी मार्केट में निवेश करने की रुचि भी फिलहाल कम हुई है। आईपीओ की ओवरसब्सक्रिप्शन दर भी काफी कम रही है और लिस्टिंग के बाद निवेशकों को कमजोर रिटर्न मिल रहे हैं, जिसका असर पूरे प्राइमरी मार्केट पर पड़ रहा है।
2025 में लगभग 43 आईपीओ ऐसे थे जो 50 गुना से अधिक सब्सक्राइब हुए थे, जो निवेशकों के मजबूत आकर्षण को दर्शाता है। पिछले वर्ष सेकेंडरी मार्केट में भी तेज़ रैली देखने को मिली थी, जिससे प्राइमरी मार्केट को मजबूती मिली थी।
हालांकि 2026 में भू-राजनीतिक तनाव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े बदलावों के कारण सेकेंडरी मार्केट में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है और प्रमुख इंडेक्स अपने ऑल-टाइम हाई से नीचे कारोबार कर रहे हैं।
स्मॉल-कैप शेयरों में से लगभग 50% अपने उच्चतम स्तर से 40% नीचे ट्रेड कर रहे हैं। लिस्टिंग के बाद शेयरों का प्रदर्शन भी निवेशकों की मानसिकता को प्रभावित कर रहा है।
