भारत–अमेरिका व्यापार वार्ता: बिगड़े रिश्तों को सुधारने के लिए अमेरिका का ‘मिशन इंडिया’, आज होगी निर्णायक बैठक

सर्जियो गोर के आगमन के साथ भारत–अमेरिका संबंधों में नए युग की शुरुआत। मंगलवार को होने वाली व्यापार वार्ता दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ाने की नई मिसाल बनेगी।

India US Trade Talks: भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ समय से चली आ रही खटास को दूर करने के लिए वॉशिंगटन ने कमर कस ली है। अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर ने दिल्ली पहुंचते ही जो भरोसा दिलाया है, उसकी पहली परीक्षा आज यानी मंगलवार को होने वाली व्यापार वार्ता में होगी। यह बैठक सिर्फ आंकड़ों और टैरिफ तक सीमित नहीं होगी, बल्कि दोनों देशों के ‘टूटे हुए रिश्तों’ को फिर से मजबूत करने की दिशा में एक नई मिसाल साबित हो सकती है।

वॉशिंगटन का मिशन: बिगड़े रिश्तों को फिर से जोड़ने की कोशिश

कुछ दिन पहले अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने भारत पर तीखे बयान दिए थे, लेकिन सर्जियो गोर ने दिल्ली आकर बिल्कुल अलग और नरम रुख अपनाया है। गोर का संदेश साफ है—
“हम रिश्तों को सुधारने को लेकर गंभीर हैं। वॉशिंगटन अब भारत के साथ सिर्फ जरूरत का नहीं, बल्कि ‘सच्चे दोस्त’ का रिश्ता बनाना चाहता है, जहां दोनों देश बराबरी के स्तर पर हों।”

आज की मंगलवार वाली वार्ता क्यों है खास?

आज जब भारत और अमेरिका के व्यापार वार्ताकार एक ही मेज पर बैठेंगे, तो चर्चा केवल टैरिफ या टैक्स तक सीमित नहीं होगी, बल्कि आपसी भरोसे को फिर से स्थापित करने की चुनौती सबसे अहम होगी।

  • Pax Silica में आमंत्रण: भारत को AI और सेमीकंडक्टर हब ‘Pax Silica’ से जुड़ने का आधिकारिक निमंत्रण इस बैठक का बड़ा मुद्दा हो सकता है।
  • व्यापार समझौते पर अंतिम मुहर: लुटनिक के बयानों के बाद, आज की चर्चा व्यापार समझौते को ‘फिनिश लाइन’ तक पहुंचाने की दिशा में अहम मोड़ दे सकती है।

ट्रंप–मोदी की दोस्ती पर सर्जियो गोर का दावा

गोर ने बार-बार जोर देकर कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की दोस्ती सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि ‘वास्तविक’ है। गोर के पास व्हाइट हाउस तक सीधी पहुंच है, जिससे वे भारत की चिंताओं को सीधे ट्रंप तक पहुंचा सकते हैं। इसी वजह से आज की बैठक को साल 2026 की सबसे परिणामदायक बैठकों में से एक माना जा रहा है।

भारत–अमेरिका: नई मिसाल की शुरुआत

अगर आज की वार्ता सफल होती है, तो यह साबित करेगा कि “सच्चे दोस्तों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन वे हमेशा समाधान निकाल लेते हैं।” भारत–अमेरिका की साझेदारी अब रक्षा, ऊर्जा और तकनीक जैसे नए क्षेत्रों में नई मिसाल कायम करने के लिए तैयार है।

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