Iran America War:
मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध तनाव का असर अब सिर्फ तेल और गैस तक सीमित नहीं रहा है। अब दुनिया की डिजिटल लाइफलाइन मानी जाने वाली समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल्स (Submarine Cables) भी खतरे में हैं।
अगर ईरान या उसके समर्थित समूह इन केबल्स को नुकसान पहुंचाते हैं, तो भारत समेत पूरी दुनिया में बैंकिंग, सोशल मीडिया और AI सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
🌊 दो सबसे खतरनाक क्षेत्र: हॉर्मुज और लाल सागर
रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक इंटरनेट ट्रैफिक के लिए दो समुद्री मार्ग बेहद अहम हैं:
- हॉर्मुज स्ट्रेट:
यहां ईरान द्वारा समुद्री माइन्स बिछाने की आशंका जताई गई है।
यह क्षेत्र बेहद संकरा (करीब 200 फीट गहराई) होने के कारण केबल्स को नुकसान पहुंचाने के लिए संवेदनशील है। - लाल सागर (Bab-el-Mandeb):
यहां ईरान समर्थित हूथी समूह जहाजों पर लगातार हमले कर रहे हैं।
इस क्षेत्र से यूरोप, एशिया और अफ्रीका को जोड़ने वाली 17 प्रमुख केबल्स गुजरती हैं।
🇮🇳 भारत पर क्या होगा असर?
भारत का अधिकांश अंतरराष्ट्रीय डेटा ट्रैफिक इन्हीं मार्गों पर निर्भर है।
महत्वपूर्ण केबल्स जैसे:
- AAE-1
- Falcon
- Gulf Bridge International
- Tata TGN-Gulf
👉 अगर ये केबल्स कट जाती हैं तो:
- UPI पेमेंट धीमे या बंद
- इंटरनेशनल कॉल्स प्रभावित
- ईमेल और क्लाउड सेवाएं बाधित
🌐 डिजिटल दुनिया पर बड़ा खतरा
आज दुनिया का 97% से ज्यादा इंटरनेट डेटा सैटेलाइट नहीं बल्कि इन अंडरसी फाइबर केबल्स से चलता है।
Amazon, Microsoft और Google के डेटा सेंटर्स (UAE और सऊदी अरब में) भी इन्हीं केबल्स पर निर्भर हैं।
👉 वीडियो कॉल, सोशल मीडिया, AI — सब कुछ इन पर टिका है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर युद्ध समुद्र के नीचे पहुंचता है, तो दुनिया की डिजिटल व्यवस्था दशकों पीछे जा सकती है।
