नई दिल्ली: संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने बुधवार (29 जनवरी, 2025) को वक्फ (संशोधन) विधेयक पर अपनी रिपोर्ट और संशोधित विधेयक को बहुमत से मंजूरी दे दी। समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने बताया कि यह विधेयक पारदर्शिता बढ़ाने और वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगा।
विपक्ष का कड़ा विरोध
विपक्षी सांसदों ने विधेयक को 15-11 मतों से पारित करने के फैसले की तीखी आलोचना की। कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी, आप और एआईएमआईएम के नेताओं ने इसे “असंवैधानिक” करार देते हुए आरोप लगाया कि यह कानून वक्फ बोर्ड को खत्म कर देगा और सरकार को मुस्लिम धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करने की शक्ति देगा।
एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यह कानून वक्फ बोर्डों को कमजोर करेगा, जबकि कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने इसे अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने वाला विधेयक बताया। डीएमके के ए राजा ने कहा कि उनकी पार्टी इस विधेयक को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी।
जेपीसी की प्रक्रिया पर सवाल
समिति के गठन के बाद से दिल्ली में 38 बैठकें हुईं और पूरे देश में हितधारकों से परामर्श किया गया। विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया कि 655 पन्नों की रिपोर्ट उन्हें केवल एक रात पहले दी गई, जिससे उन्हें विरोध दर्ज कराने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला।
संशोधनों की मुख्य बातें
- “वक्फ बाय यूजर” (Waqf by User) प्रावधान हटाने का समर्थन, लेकिन केवल भविष्य में लागू होगा।
- सरकारी स्वामित्व वाली या विवादमुक्त संपत्तियों पर पुराने मामलों को दोबारा नहीं खोला जाएगा।
- गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड में शामिल करने का समर्थन, ताकि वे हितधारक या विवाद के पक्षकार बन सकें।
- सरकारी संपत्तियों से जुड़े विवादों की जांच का अधिकार अब जिला कलेक्टर से हटाकर राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी को दिया जाएगा।
बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने इन बदलावों को सही ठहराते हुए कहा कि यह विधेयक वक्फ बोर्डों में पारदर्शिता और जवाबदेही लाएगा, जिससे मुस्लिम समुदाय सशक्त होगा।
आगे की प्रक्रिया
जेपीसी की रिपोर्ट 30 जनवरी, 2025 को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को सौंपी जाएगी। अब यह संसद पर निर्भर करेगा कि इसे आगामी 31 जनवरी से शुरू होने वाले बजट सत्र में पारित किया जाए या नहीं।
