Explainer:
कल्पना कीजिए कि आपने वर्षों पहले घर खरीदने के लिए लोन लिया था और अब उसका आखिरी किस्त चुका दी है। ऐसे में उम्मीद होती है कि अब आपकी आर्थिक स्थिति बेहतर होगी।
भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर भी यही सवाल उठ रहा है—जब सरकार ने ₹2.92 लाख करोड़ के ऑयल बॉन्ड का कर्ज चुका दिया, तो क्या अब कीमतें घटेंगी?
🛢️ ऑयल बॉन्ड क्या होते हैं?
ऑयल बॉन्ड एक वित्तीय साधन था, जिसे 2005 से 2010 के बीच UPA सरकार ने जारी किया था।
उस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम $100 प्रति बैरल से ऊपर चले गए थे। आम जनता को राहत देने के लिए सरकार ने तेल कंपनियों को नकद सब्सिडी देने के बजाय बॉन्ड दिए।
इन बॉन्ड पर 7% से 8.4% तक ब्याज देना तय हुआ था।
💰 कुल कितना कर्ज था?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार:
- मूल कर्ज: ₹1.48 लाख करोड़
- ब्याज: ₹1.44 लाख करोड़
👉 कुल बोझ: ₹2.92 लाख करोड़
सरकार ने मार्च 2026 तक यह पूरा कर्ज चुका दिया है।
❓ फिर भी पेट्रोल-डीजल सस्ता क्यों नहीं?
1. सरकार की भारी कमाई
2014 से 2023 के बीच सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी से लगभग ₹20-25 लाख करोड़ कमाए—जो ऑयल बॉन्ड के कर्ज से कई गुना ज्यादा है।
2. एक्साइज ड्यूटी में भारी बढ़ोतरी
- 2014: ₹9.48 प्रति लीटर
- 2020: ₹32.98 प्रति लीटर (पीक)
⛽ कीमतों को प्रभावित करने वाले बड़े कारण
1. अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम
भारत 85% तेल आयात करता है।
👉 अभी युद्ध के कारण कीमतें बढ़ी हुई हैं।
2. डॉलर के मुकाबले रुपया
रुपया कमजोर होने पर आयात महंगा हो जाता है।
3. टैक्स का बोझ
- केंद्र: एक्साइज ड्यूटी
- राज्य: VAT
👉 कुल मिलाकर कीमत का बड़ा हिस्सा टैक्स होता है।
🌍 युद्ध का असर
मिडिल ईस्ट में युद्ध और हॉर्मुज स्ट्रेट पर संकट के कारण:
- ब्रेंट क्रूड $112 प्रति बैरल से ऊपर
- सप्लाई चेन प्रभावित
भारत की 85% तेल और 65% LPG जरूरत आयात से पूरी होती है।
📉 क्या कीमतें घटेंगी?
विशेषज्ञों के अनुसार:
👉 जब तक कच्चा तेल $70-75 प्रति बैरल तक नहीं आता,
👉 तब तक कीमतों में बड़ी राहत की संभावना कम है।
अभी हालात को देखते हुए कीमतें स्थिर या बढ़ने की ही संभावना ज्यादा है।
