Gujarat Health Report: गुजरात को स्वास्थ्य क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ता राज्य बताया जाता है। यहां तक कहा जाता है कि देश-विदेश से मरीज इलाज के लिए गुजरात आते हैं, लेकिन कड़वी हकीकत यह है कि राज्य में बीमारियों पर अब तक काबू नहीं पाया जा सका है।
पिछले तीन वर्षों में गुजरात में करीब 36.46 लाख मरीज अस्पतालों में भर्ती हुए हैं। इससे साफ है कि गुजरात धीरे-धीरे “बीमार गुजरात” की पहचान बना रहा है।
हर साल औसतन 12 लाख से ज्यादा गुजराती बीमार
राज्य सरकार हर साल बजट में स्वास्थ्य सेवाओं पर करोड़ों रुपये खर्च करती है, इसके बावजूद हालात चिंताजनक बने हुए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, गुजरात में हर साल औसतन 12 लाख से ज्यादा लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं।
3 साल में 36.46 लाख मरीज भर्ती
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार—
- वर्ष 2022-23 में: 9.15 लाख मरीज भर्ती
- वर्ष 2023-24 में: 12.80 लाख मरीज भर्ती
- वर्ष 2024-25 में: 14.51 लाख मरीज भर्ती
इस तरह तीन वर्षों में कुल 36.46 लाख मरीजों को अस्पताल में इलाज कराना पड़ा।

आयुष्मान कार्ड के सहारे इलाज, 10,132 करोड़ रुपये खर्च
आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों को 10 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है। पिछले तीन वर्षों में भर्ती मरीजों के इलाज पर कुल मिलाकर 10,132 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। हर साल इलाज पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है।
इन बीमारियों का सबसे ज्यादा खतरा
“स्वस्थ गुजरात” के दावों के बीच हकीकत यह है कि राज्य में—
- कैंसर
- डायबिटीज
- संक्रामक रोग
- हैजा (कॉलरा)
- टाइफॉयड
- चिकनगुनिया
- डेंगू
जैसी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, खासकर पानी से फैलने वाली बीमारियों में गुजरात शीर्ष राज्यों में शामिल है।
जहां एक ओर सरकार मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर राज्य में बढ़ती बीमारियों पर गंभीर ध्यान देने की जरूरत है।
