सूरत, शुक्रवार (प्रतिनिधि):
तमिलनाडु के कोयंबटूर में एक वरिष्ठ नागरिक से आरटीओ चालान की फर्जी APK फाइल भेजकर ₹16.50 लाख की साइबर ठगी के मामले में सूरत क्राइम ब्रांच ने बड़ी कार्रवाई की है। इस केस में सूरत के सगे भाइयों समेत कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर उन्हें तमिलनाडु पुलिस के हवाले कर दिया गया है।
क्राइम ब्रांच सूत्रों के अनुसार, कोयंबटूर में रहने वाले एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ नागरिक को 9 सितंबर 2025 को ठगों ने आरटीओ चालान के नाम पर एक APK फाइल भेजी थी। जैसे ही पीड़ित ने वह फाइल मोबाइल में इंस्टॉल की, ठगों ने उनके बैंक खातों और कार्ड्स तक पहुंच बना ली और ₹16,49,961 की रकम निकाल ली। इस संबंध में कोयंबटूर सिटी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था।
सूरत कनेक्शन का खुलासा
जांच के दौरान सामने आया कि इस साइबर फ्रॉड में सूरत के अमरोली स्थित अभिषेक रेसिडेंसी में रहने वाला रजनी भालड़िया और सीमाडा गांव में रहने वाला विश्वास रादड़िया शामिल हैं। इसके बाद कोयंबटूर साइबर क्राइम पुलिस ने सूरत क्राइम ब्रांच से संपर्क किया।
सूरत क्राइम ब्रांच ने दोनों आरोपियों से पूछताछ की, जिसमें उनके साथ अन्य आठ साथियों की भूमिका भी सामने आई। इसके बाद सभी दस आरोपियों को हिरासत में लेकर आगे की कार्रवाई के लिए तमिलनाडु पुलिस को सौंप दिया गया।
मौज-शौक के लिए करते थे साइबर अपराधियों की मदद
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए युवक मौज-शौक के लिए 6 से 7 लाख रुपये लिमिट वाले क्रेडिट कार्ड रखते थे। कार्ड की रकम चुकाने के लिए वे साइबर माफियाओं को अपने बैंक खाते और क्रेडिट कार्ड 2 प्रतिशत कमीशन पर इस्तेमाल करने देते थे।
पुलिस का कहना है कि इस गिरोह ने इसी तरीके से कई साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम दिया है। फिलहाल तमिलनाडु पुलिस सभी आरोपियों से आगे की पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस गिरोह ने देश के अन्य हिस्सों में कितनी साइबर ठगी की घटनाएं की हैं।
