सूरत के 1.33 लाख रेहड़ीवालों ने कारोबार के लिए बैंकों से ₹204 करोड़ का ऋण लिया

मेहनत रंग लाई, हजारों रेहड़ीवाले सूदखोरों के जाल से बाहर आए

सूरत, डायमंड और टेक्सटाइल सिटी के रूप में देशभर में पहचाना जाने वाला सूरत अब आत्मनिर्भर रेहड़ी वालों के शहर के रूप में भी उभर रहा है। सूरत शहर में रोज़गार और भोजन—दोनों आसानी से उपलब्ध हैं। इसी कारण अब शहर में लारी-पाथरणा (रेहड़ी) चलाकर जीवनयापन करने वाले छोटे व्यापारियों ने बैंकिंग सेक्टर से जुड़कर अब तक कुल ₹204 करोड़ का ऋण लेकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। सूरत महानगरपालिका के सहयोग से प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के अंतर्गत हजारों परिवारों को सूदखोरों के चंगुल से मुक्ति मिली है।

दस्तावेज़ तैयार कराने में नगर निगम की मदद से फुटपाथ या लारी पर व्यापार करने वाले रेहड़ीवाले बैंकिंग सेक्टर से जुड़े।

सूरत शहर में फुटपाथ या सड़क किनारे खड़े होकर लाखों लोग अपनी आजीविका चला रहे हैं। प्रशासन के एक अनुमान के अनुसार दो लाख से अधिक लोग लारी कल्चर के सहारे व्यापार कर रहे हैं। इनमें से 1.33 लाख रेहड़ी-पटरी वालों को बैंकिंग सेक्टर से जोड़ने में सूरत महानगरपालिका की मेहनत रंग लाई है। निगम के सतत प्रयासों से हजारों परिवार सूदखोरी के विषचक्र से बाहर निकल पाए हैं।

प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना लागू होने से पहले छोटे व्यापारियों को कारोबार के लिए पैसों की ज़रूरत पड़ने पर ऊँचे ब्याज पर निजी साहूकारों पर निर्भर रहना पड़ता था। इसी स्थिति को बदलने के लिए शहरी रेहड़ीवालों को ब्याज पर पैसा लेने के बजाय बैंकों से छोटी कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) ऋण दिलाने हेतु महानगरपालिका ने विशेष प्रयास किए और पीएम स्वनिधि योजना से उन्हें जोड़ने के लिए व्यापक फील्ड वर्क किया।

प्रशासन के ये प्रयास सफल रहे। ऋण के लिए आवश्यक दस्तावेज़ तैयार कराकर सूरत महानगरपालिका ने अहम कड़ी की भूमिका निभाई। इसके परिणामस्वरूप आज शहर में सब्ज़ी बेचने वाले हों या फल, कपड़े और खान-पान का व्यापार करने वाले सामान्य दुकानदार—सभी के पास बैंक खाते हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने क्यूआर कोड भी अपनाया है और डिजिटल भुगतान स्वीकार करने लगे हैं।

अब शहरभर के रेहड़ी-पटरी वाले सीधे बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ गए हैं। पिछले तीन वर्षों में इस सरकारी योजना के तहत पहले, दूसरे और तीसरे चरण को मिलाकर कुल 1,33,058 शहरी रेहड़ी-पटरी वालों ने बैंकों से ऋण लिया है। कुल राशि ₹200 करोड़ से अधिक हो चुकी है।

अब तक विभिन्न बैंकों द्वारा कुल ₹204 करोड़ का ऋण वितरित किया गया है। इनमें पहले चरण में 91,293 लाभार्थियों को ₹91.88 करोड़, दूसरे चरण में 32,984 रेहड़ी-पटरी वालों को ₹66.75 करोड़ तथा तीसरे चरण में 9,081 व्यापारियों को ₹45.36 करोड़ का ऋण मिला है, जिससे उन्होंने अपने व्यवसाय को आर्थिक उड़ान दी है।

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