Gen Z on Changing Jobs: जनरेशन Z में आमतौर पर 1995 से 2010 के बीच जन्मे लोगों को शामिल किया जाता है।
जब ग्रेजुएशन पूरा होता है, तो हर युवा नौकरी की तलाश में (Gen Z on Changing Jobs) जुट जाता है। हर किसी की इच्छा होती है कि उन्हें एक अच्छी नौकरी मिले। हालांकि, देश में बेरोजगारी और नौकरी मिलने के बाद उसे खोने की अनिश्चितता को लेकर कई सर्वे रिपोर्ट्स में अलग-अलग दावे किए गए हैं। हाल ही में जारी एक नई रिपोर्ट ने यह खुलासा किया है कि वर्तमान समय के युवाओं का नौकरी के प्रति क्या नजरिया है। जनरेशन Z, यानी Gen Z, का नौकरी को लेकर एक अलग ही दृष्टिकोण है। आइए जानें कि नई जनरेशन के मन में नौकरी को लेकर क्या विचार हैं।
नौकरी को लेकर बदलते विचार
भारत के युवाओं में नौकरी के प्रति नए विचार बन रहे हैं। एक सर्वे के अनुसार, 47% Gen Z युवा दो साल के भीतर अपनी नौकरी छोड़ देते हैं, जबकि 46% युवा वर्क-लाइफ बैलेंस को प्राथमिकता देते हैं। ‘Gen Z at Workplace’ नामक यह रिपोर्ट 5,350 से अधिक Gen Z युवाओं और 500 HR प्रोफेशनल्स के सर्वेक्षण के आधार पर तैयार की गई है।
इस रिपोर्ट में जनरेशन Z के नौकरी बदलने के कारण, जॉब मार्केट में प्रवेश के समय उनकी सबसे बड़ी चिंताएं, मानसिक स्वास्थ्य के प्रति उनकी अपेक्षाएं और कार्यशैली से जुड़ी चिंताओं का अध्ययन किया गया है।
जॉब सिक्योरिटी और अन्य पहलू
जहां 46% Gen Z युवा दो साल के भीतर नौकरी छोड़ने को तैयार हैं, वहीं 51% युवाओं को अपनी नौकरी खोने का डर है। यह चिंता उनकी करियर संभावनाओं तक भी फैलती है, क्योंकि 40% युवा नौकरी मिलने के बाद अपने पसंदीदा क्षेत्र में पोस्ट बनाए रखने को लेकर चिंतित रहते हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 77% युवा प्रोफेशनल क्षेत्र में प्राथमिकता देने वाली ब्रांड्स और भूमिकाओं पर फोकस करते हैं, जिसमें से 43% युवा अनुभव और ग्रोथ के अवसरों को अधिक महत्व देते हैं।
नौकरी बदलने के मुख्य कारण
जहां 78% Gen Z युवा करियर ग्रोथ के लिए नौकरी बदलने को सही मानते हैं, वहीं 71% HR प्रोफेशनल्स का मानना है कि इसका मुख्य कारण बेहतर सैलरी है। हालांकि, नई पीढ़ी के 25% लोग नौकरी बदलते समय सैलरी से ज्यादा प्रेरणा को महत्व देते हैं।
जनरेशन Z, यानी 1995 से 2010 के बीच जन्मे लोग, एक नई सोच और दृष्टिकोण के साथ नौकरी और करियर को देखते हैं। उनके विचार और प्राथमिकताएं परंपरागत सोच से काफी अलग हैं।
