नवरात्रि से दिवाली 2026 तक देशभर में त्योहारों के दौरान ₹7 लाख करोड़ से अधिक का कारोबार होने का अनुमान है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के आंकड़ों के मुताबिक, यह पिछले साल दिवाली के दौरान हुए ₹6.05 लाख करोड़ के रिकॉर्ड कारोबार से करीब 15–18% अधिक होगा। इसमें वस्तुओं के साथ सेवाओं के कारोबार में भी बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद है।
सामान की बिक्री में इन क्षेत्रों की बड़ी हिस्सेदारी
पिछले साल त्योहारों के दौरान करीब ₹5.40 लाख करोड़ का कारोबार सामान की बिक्री से और ₹65,000 करोड़ का सेवाओं से हुआ था। इस साल किराना और FMCG की अनुमानित हिस्सेदारी 12%, सोना-चांदी और आभूषण 10%, इलेक्ट्रॉनिक्स 8%, टिकाऊ उपभोक्ता सामान, कपड़े और गिफ्ट आइटम 7-7% तथा होम डेकोर और फर्नीचर 5-5% रहने का अनुमान है।
मिठाई-नमकीन की हिस्सेदारी 5%, कपड़ा 4%, पूजा सामग्री, फल-सूखे मेवे और बेकरी उत्पादों की 3-3%, फुटवियर की 2% और अन्य वस्तुओं व संबंधित कारोबार की 19% रहने की संभावना है।
सेवा क्षेत्र का कारोबार ₹1 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है
इस बार त्योहारों के दौरान सेवा क्षेत्र में 20–25% वृद्धि का अनुमान है। पिछले साल के ₹65,000 करोड़ के मुकाबले इस साल इसका कारोबार ₹80,000 करोड़ से ₹1 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है।
परिवहन, लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स डिलीवरी, पैकेजिंग, वेयरहाउसिंग, होटल, रेस्टोरेंट, पर्यटन, कैटरिंग, टेंट-सजावट, लाइटिंग, इवेंट मैनेजमेंट और स्थानीय परिवहन जैसी सेवाओं की मांग बढ़ने की उम्मीद है।
स्थानीय कारोबारियों और MSME को फायदा
त्योहारों में बढ़ते कारोबार से स्थानीय कारीगरों, MSME, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप, हस्तशिल्प कारोबारियों, भारतीय ब्रांडों, छोटे व्यापारियों और स्थानीय निर्माताओं को फायदा मिलने की संभावना है। नवरात्रि, दुर्गा पूजा, दशहरा, करवा चौथ, धनतेरस, दिवाली, गोवर्धन पूजा, भैया दूज, छठ पूजा, गुरु नानक जयंती और तुलसी विवाह जैसे त्योहार बाजार में मांग बढ़ाएंगे।
CAIT के अनुमान के अनुसार, यह तेजी केवल दुकानों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि परिवहन, खानपान, पर्यटन, सजावट और डिलीवरी सहित पूरे व्यापारिक तंत्र को लाभ पहुंचा सकती है। इससे ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘मेड इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ से जुड़े स्थानीय उत्पादों और कारोबार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
