शुक्रवार को कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स 740 से ज्यादा अंक गिरकर 74,160 और निफ्टी 50 करीब 250 अंक टूटकर 23,231 के इंट्राडे स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती महज 5 मिनट में निवेशकों की करीब ₹6 लाख करोड़ की संपत्ति घट गई।
₹6 लाख करोड़ का झटका
बाजार में तेज गिरावट से BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब ₹478 लाख करोड़ रह गया। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी करीब 1.5% तक टूटे।
क्रूड ऑयल $109 के पार
मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान तनाव और यमन के हूती विद्रोहियों व सऊदी समर्थित बलों के बीच संघर्ष बढ़ने से ब्रेंट क्रूड $109 प्रति बैरल के पार पहुंच गया। इससे सप्लाई बाधित होने और वैश्विक महंगाई बढ़ने की आशंका बढ़ी है, जिसका असर भारत की GDP ग्रोथ और कंपनियों की कमाई पर पड़ सकता है।
US Bond Yield 4.98% पर
अमेरिका में महंगाई और कर्ज की चिंता के बीच 10 साल की US Treasury Yield बढ़कर 4.98% पहुंच गई, जो 5% के बेहद करीब है। ऊंची यील्ड से विदेशी निवेशकों के भारतीय बाजार से पैसा निकालने की आशंका बढ़ी है। अमेरिका में मजबूत महंगाई आंकड़ों से Fed की ओर से ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना ने भी दबाव बढ़ाया।
अमेरिका-ईरान तनाव से चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा यमन में हूती विद्रोहियों की गतिविधियों से तेल सप्लाई प्रभावित होने का डर बढ़ा है। इससे वैश्विक बाजारों में जोखिम बढ़ा है।
IPO और FII बिकवाली भी वजह
देश में IPO की बढ़ती गतिविधियों के कारण बाजार का पैसा प्राइमरी मार्केट की ओर जाने से सेकेंडरी मार्केट पर दबाव पड़ा। दूसरी ओर भारतीय रुपया 27 पैसे गिरकर डॉलर के मुकाबले ₹95.79 पर पहुंच गया।
इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने बाजार की गिरावट को और तेज कर दिया। कुल मिलाकर महंगा क्रूड, बढ़ती US Bond Yield, महंगाई, भू-राजनीतिक तनाव, कमजोर रुपया और FII बिकवाली ने शेयर बाजार पर भारी दबाव बनाया।
