वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। अमेरिकी प्रशासन ने दावा किया है कि फरवरी 2026 से शुरू हुई सैन्य झड़पें अब “समाप्त” हो चुकी हैं, जिससे War Powers Resolution के तहत लागू होने वाली समय सीमा से बचा जा सके। इस बयान के बाद अमेरिका में कानूनी और राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
क्या है पूरा मामला?
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजराइल ने संयुक्त रूप से ईरान पर एयरस्ट्राइक की।
- इसके जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमले किए
- इस युद्ध में हजारों लोगों की मौत और बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ
अप्रैल की शुरुआत में दोनों देशों के बीच एक सीजफायर (युद्धविराम) लागू हुआ, जिसके बाद से सीधे हमले नहीं हुए हैं।
War Powers Resolution क्या है?
अमेरिका का 1973 का War Powers Resolution कानून कहता है:
- राष्ट्रपति बिना कांग्रेस की मंजूरी के 60 दिन तक ही सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं
- इसके बाद या तो अनुमति लेनी होगी या सेना हटानी होगी
60 दिन की यह समयसीमा 1 मई 2026 को पूरी हो रही थी।
प्रशासन का दावा: “संघर्ष समाप्त हो चुका”
ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा:
- “फरवरी में शुरू हुई शत्रुता अब समाप्त हो चुकी है”
- क्योंकि अप्रैल से सीजफायर लागू है और कोई फायरिंग नहीं हुई
प्रशासन का तर्क है कि इससे 60 दिन की कानूनी समयसीमा लागू नहीं होती।
विपक्ष का आरोप: कानून से बचने की कोशिश
डेमोक्रेट नेताओं और विशेषज्ञों ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं:
- War Powers कानून में सीजफायर से टाइमर रुकने का कोई प्रावधान नहीं
- प्रशासन पर आरोप है कि वह कांग्रेस की मंजूरी से बचना चाहता है
इससे अमेरिका में संवैधानिक टकराव की स्थिति बन सकती है।
कांग्रेस में क्या हो रहा है?
- डेमोक्रेट्स ने कई बार प्रस्ताव लाकर युद्ध रोकने की कोशिश की
- लेकिन रिपब्लिकन बहुमत ने इन्हें रोक दिया
- कुछ रिपब्लिकन नेता भी इस पर सवाल उठा रहे हैं
यह मामला अब व्हाइट हाउस vs कांग्रेस की लड़ाई बन गया है।
आगे क्या असर?
विशेषज्ञों के मुताबिक:
- अगर प्रशासन बिना मंजूरी के कार्रवाई जारी रखता है, तो कानूनी संकट गहरा सकता है
- वैश्विक स्तर पर भी यह तनाव तेल बाजार और भू-राजनीति को प्रभावित कर सकता है
- अमेरिका के अंदर राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ रहा है
अमेरिका-ईरान संघर्ष अब सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि कानूनी और राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। प्रशासन का “संघर्ष समाप्त” वाला दावा और विपक्ष की आपत्ति आने वाले दिनों में बड़ा संवैधानिक विवाद पैदा कर सकती है।
