नई दिल्ली/लंदन: वैश्विक तेल बाजार में फिर बड़ी हलचल देखने को मिली है। कच्चे तेल की कीमतें लगभग 3% चढ़कर बंद हुईं, क्योंकि Strait of Hormuz में सप्लाई बाधित होने की चिंता ने बाजार को झटका दिया। दूसरी ओर, UAE के OPEC छोड़ने की खबर आई, लेकिन निवेशकों ने फिलहाल सप्लाई संकट को ज्यादा गंभीर माना।
रिपोर्ट्स के अनुसार, Brent Crude $111 प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जबकि WTI Crude करीब $100 प्रति बैरल के आसपास ट्रेड करता दिखा। बाजार का फोकस इस समय मध्य पूर्व से तेल आपूर्ति पर है, जहां समुद्री मार्गों में बाधा ने कीमतों को सहारा दिया है।
क्यों बढ़ी तेल कीमतें?
विशेषज्ञों के अनुसार तेल में तेजी के पीछे मुख्य कारण ये रहे:
- हॉर्मुज जलमरूमध्य में शिपिंग बाधा
- मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव
- वैश्विक सप्लाई चेन पर असर
- निवेशकों की panic buying
- OPEC+ उत्पादन संतुलन पर अनिश्चितता
UAE के OPEC छोड़ने का क्या असर?
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने OPEC और OPEC+ समूह छोड़ने का फैसला किया है। लंबे समय में इससे OPEC की सामूहिक ताकत कमजोर हो सकती है और उत्पादन नीति बदल सकती है। हालांकि फिलहाल बाजार ने इस खबर से ज्यादा सप्लाई बाधा को महत्व दिया।
भारत पर क्या असर पड़ेगा?
भारत दुनिया के बड़े तेल आयातकों में शामिल है, इसलिए महंगे तेल का सीधा असर पड़ सकता है:
- पेट्रोल-डीजल कीमतों पर दबाव
- आयात बिल बढ़ सकता है
- रुपये पर दबाव
- महंगाई बढ़ने का खतरा
- ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स लागत में वृद्धि
शेयर बाजार किन सेक्टरों पर नजर रखे?
यदि तेल कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं तो इन सेक्टरों पर असर पड़ सकता है:
- एविएशन
- पेंट कंपनियां
- केमिकल उद्योग
- FMCG
- ऑटो सेक्टर
वहीं ONGC, Oil India जैसी upstream कंपनियों को फायदा मिल सकता है।
आगे क्या रहेगा बाजार का फोकस?
अब निवेशकों की नजर इन बातों पर रहेगी:
- हॉर्मुज मार्ग कब सामान्य होगा
- OPEC+ अगला कदम क्या उठाएगा
- अमेरिका और ईरान तनाव कम होगा या नहीं
- वैश्विक मांग कितनी मजबूत है
कच्चे तेल में 3% तेजी बताती है कि फिलहाल बाजार सप्लाई संकट को सबसे बड़ा जोखिम मान रहा है। UAE के OPEC छोड़ने की खबर महत्वपूर्ण है, लेकिन तुरंत असर हॉर्मुज संकट का ज्यादा दिख रहा है। यदि हालात नहीं सुधरे तो तेल कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।
