दुनिया के शेयर बाजारों की रैंकिंग में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर कंपनियों में आई जबरदस्त तेजी के चलते दक्षिण कोरिया ने भारत को पीछे छोड़ दिया है और अब दुनिया का छठा सबसे बड़ा शेयर बाजार बन गया है। इसके साथ ही भारत वैश्विक बाजार पूंजीकरण (Market Capitalization) के आधार पर सातवें स्थान पर खिसक गया है।
इससे पहले ताइवान भी भारत को पीछे छोड़कर पांचवें स्थान पर पहुंच चुका था। यानी केवल एक सप्ताह के भीतर भारत छठे स्थान से फिसलकर सातवें स्थान पर पहुंच गया है।
AI और चिप कंपनियों ने बदली तस्वीर
विश्लेषकों के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक की बढ़ती मांग का सबसे बड़ा लाभ दक्षिण कोरिया और ताइवान की सेमीकंडक्टर कंपनियों को मिला है।
दक्षिण कोरिया की प्रमुख कंपनियां Samsung Electronics और SK Hynix ने इस उछाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। AI सर्वर, डेटा सेंटर और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग में इस्तेमाल होने वाली मेमोरी चिप्स की मांग बढ़ने से इन कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली।
इन्हीं कंपनियों की बदौलत दोनों का संयुक्त बाजार मूल्य 1 ट्रिलियन डॉलर क्लब में शामिल हो गया है।
दक्षिण कोरिया का मार्केट कैप 5 ट्रिलियन डॉलर के पार
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में दक्षिण कोरिया की सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 86 प्रतिशत बढ़कर लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया है।
वहीं दूसरी ओर भारतीय शेयर बाजार का कुल मार्केट कैप घटकर लगभग 4.8 ट्रिलियन डॉलर रह गया है।
इस बदलाव के साथ दक्षिण कोरिया मूल्य के आधार पर भारत से आगे निकल गया है।
राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के सुधारों का भी असर
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल AI सेक्टर ही नहीं, बल्कि दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग द्वारा प्रस्तावित कॉरपोरेट सुधारों ने भी निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है।
इन सुधारों का असर देश के प्रमुख शेयर सूचकांक KOSPI पर भी दिखाई दिया है। KOSPI ने इस वर्ष राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित 5,000 अंकों के लक्ष्य को पार कर लिया है।
कुछ अंतरराष्ट्रीय निवेश बैंक और वॉल स्ट्रीट विश्लेषक भविष्य में KOSPI के 10,000 अंक तक पहुंचने की संभावना भी जता रहे हैं।
भारत पर क्यों बढ़ा दबाव?
भारतीय शेयर बाजार इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रहा है।
मुख्य कारणों में शामिल हैं:
- रुपये की कमजोरी
- विदेशी निवेशकों द्वारा रिकॉर्ड बिकवाली
- AI इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी बड़ी कंपनियों की कमी
- बढ़ती ऊर्जा कीमतें
- महंगाई को लेकर चिंता
- आर्थिक विकास दर पर दबाव
इन कारणों से विदेशी निवेशकों ने इस वर्ष भारतीय इक्विटी बाजार से करीब 26 अरब डॉलर की निकासी की है।
भारतीय बाजार में 11% की गिरावट
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय प्रमुख शेयर सूचकांक में वर्ष 2026 के दौरान अब तक लगभग 11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
यदि यह रुझान जारी रहता है तो भारतीय शेयर बाजार एक दशक में पहली बार वार्षिक आधार पर गिरावट दर्ज कर सकता है।
फिर भी अर्थव्यवस्था के मामले में भारत आगे
हालांकि मार्केट कैपिटलाइजेशन के मामले में दक्षिण कोरिया भारत से आगे निकल गया है, लेकिन आर्थिक आकार के लिहाज से भारत अब भी काफी आगे है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुमान के अनुसार:
- भारत की अर्थव्यवस्था: लगभग 4.15 ट्रिलियन डॉलर
- दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था: लगभग 1.93 ट्रिलियन डॉलर
इस प्रकार भारत की अर्थव्यवस्था दक्षिण कोरिया की तुलना में दोगुने से भी अधिक आकार की बनी हुई है।
मार्केट कैप के आधार पर दुनिया के शीर्ष 10 शेयर बाजार
| रैंक | देश |
|---|---|
| 1 | अमेरिका |
| 2 | चीन |
| 3 | जापान |
| 4 | हांगकांग |
| 5 | ताइवान |
| 6 | दक्षिण कोरिया |
| 7 | भारत |
| 8 | कनाडा |
| 9 | यूनाइटेड किंगडम |
| 10 | फ्रांस |
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए यह एक चेतावनी संकेत जरूर है, लेकिन लंबी अवधि में मजबूत आर्थिक विकास, बढ़ती घरेलू खपत और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश भारतीय बाजार को फिर से मजबूती प्रदान कर सकते हैं।
हालांकि निकट भविष्य में विदेशी निवेश प्रवाह, रुपये की स्थिति और AI सेक्टर में भारत की भागीदारी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
