अहमदाबाद: भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन आमतौर पर फीफा वर्ल्ड कप के वर्षों में सकारात्मक रहा है। पिछले तीन दशकों के आंकड़ों पर नजर डालें तो अधिकांश फीफा वर्ल्ड कप वर्षों में बीएसई सेंसेक्स ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया है। इनमें वर्ष 2006 सबसे शानदार रहा, जब सेंसेक्स ने करीब 46.7 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की थी।
विश्लेषण के अनुसार, फीफा वर्ल्ड कप के वर्षों में सेंसेक्स का रिटर्न 3.5 प्रतिशत से लेकर 46.7 प्रतिशत तक रहा है। वर्ष 2002 में जापान और दक्षिण कोरिया की संयुक्त मेजबानी में आयोजित फीफा वर्ल्ड कप के दौरान सेंसेक्स में लगभग 3.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। वहीं, 2006 में जर्मनी में खेले गए फीफा वर्ल्ड कप के दौरान भारतीय शेयर बाजार ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया और सेंसेक्स करीब 46.7 प्रतिशत उछल गया था।
हालांकि इस ट्रेंड का सबसे बड़ा अपवाद वर्ष 1998 रहा। उस समय सेंसेक्स में लगभग 16.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। इसके पीछे कई घरेलू और वैश्विक कारण जिम्मेदार थे।
मई 1998 में भारत द्वारा पोखरण परमाणु परीक्षण किए जाने के बाद अमेरिका और जापान सहित कई देशों ने भारत पर आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंध लगा दिए थे। इन प्रतिबंधों का असर निवेशकों की धारणा पर पड़ा और बाजार दबाव में आ गया। हालांकि बाद में ये प्रतिबंध हटा लिए गए, लेकिन उस वर्ष शेयर बाजार पर इसका नकारात्मक प्रभाव साफ दिखाई दिया था।
वर्ष 1998 भारतीय राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण रहा। आम चुनावों के बाद भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में उभरी और अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में गठबंधन सरकार बनी। राजनीतिक और आर्थिक घटनाक्रमों के बीच शेयर बाजार कमजोर बना रहा।
2026 में क्या दोहराएगा 1998 का इतिहास?
वर्तमान वर्ष 2026 में भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन कुछ हद तक 1998 की याद दिला रहा है। साल की शुरुआत से अब तक सेंसेक्स लगभग 13 प्रतिशत गिरकर 73,900 के आसपास पहुंच गया है।
इस गिरावट के पीछे पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उससे पैदा हुई वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता को प्रमुख कारण माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, क्षेत्रीय तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ा है और रुपये पर दबाव बना है।
इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है। ऐसे में निवेशकों के बीच यह सवाल बना हुआ है कि क्या 2026 भी फीफा वर्ल्ड कप के वर्ष में सकारात्मक रिटर्न देने की परंपरा को कायम रख पाएगा या फिर 1998 जैसी स्थिति दोबारा देखने को मिलेगी।
फीफा वर्ल्ड कप वर्षों में सेंसेक्स का प्रदर्शन
| वर्ष | मेजबान देश | रिटर्न (%) |
|---|---|---|
| 1990 | इटली | 34.6 |
| 1994 | अमेरिका | 17.4 |
| 1998 | फ्रांस | -16.5 |
| 2002 | जापान/दक्षिण कोरिया | 3.5 |
| 2006 | जर्मनी | 46.7 |
| 2010 | दक्षिण अफ्रीका | 17.4 |
| 2014 | ब्राज़ील | 29.9 |
| 2018 | रूस | 5.9 |
| 2022 | कतर | 4.4 |
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ऐतिहासिक आंकड़े सकारात्मक संकेत जरूर देते हैं, लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और भू-राजनीतिक जोखिमों को देखते हुए निवेशकों को सतर्कता बरतनी चाहिए।
