नई दिल्ली: हिंदुओं की सबसे पवित्र धार्मिक यात्राओं में से एक कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर चीन ने बड़ा फैसला लिया है। चीन सरकार ने जून-जुलाई के दौरान भारतीय नागरिकों के लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा परमिट जारी करने पर रोक लगा दी है। इस निर्णय के कारण हजारों श्रद्धालु तिब्बत-चीन सीमा पर फंस गए हैं और उन्हें भारी निराशा का सामना करना पड़ रहा है। अब केवल गैर-निवासी भारतीय (NRI) यात्रियों को ही यात्रा की अनुमति देने का निर्णय लिया गया है।
3,000 से अधिक भारतीयों के परमिट लंबित
कुछ दिनों पहले ही चीन ने भारतीय श्रद्धालुओं के लिए ‘कॉमन किचन’ का नियम लागू किया था, जिससे यात्रियों के लिए अपनी धार्मिक परंपराओं और खान-पान की मान्यताओं का पालन करना कठिन हो गया था। इसके बावजूद श्रद्धालुओं ने यात्रा जारी रखने का प्रयास किया। अब चीन प्रशासन पर जानबूझकर वीजा प्रक्रिया में देरी करने के आरोप लग रहे हैं, जिसके कारण 3,000 से अधिक भारतीय यात्रियों के परमिट लंबित पड़े हुए हैं।
तिब्बत सीमा पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़
चीन के इस फैसले से तिब्बत सीमा क्षेत्र में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जमा हो गए हैं। वीजा और परमिट नहीं मिलने के कारण हजारों किलोमीटर की यात्रा करके पहुंचे अनेक श्रद्धालुओं को बिना दर्शन किए ही मायूस होकर वापस लौटना पड़ रहा है। इससे यात्रियों में भारी नाराजगी और निराशा देखने को मिल रही है।
सामान्य भारतीय नागरिकों के लिए यात्रा बंद
चीन सरकार द्वारा बनाए गए नए नियम के अनुसार केवल विशेष श्रेणी के पासपोर्ट रखने वाले गैर-निवासी भारतीय (NRI) ही फिलहाल कैलाश मानसरोवर यात्रा कर सकेंगे। भारत के सामान्य नागरिकों के लिए यात्रा के द्वार अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं।
भारत सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
इस पूरे मामले पर भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं, गुजरात सहित कई राज्यों के टूर ऑपरेटरों ने केंद्र सरकार को लिखित ज्ञापन सौंपकर इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करने और चीन के साथ बातचीत कर समाधान निकालने की मांग की है।
धार्मिक महत्व रखने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा पर चीन के इस फैसले ने लाखों श्रद्धालुओं की भावनाओं को प्रभावित किया है और भारत-चीन संबंधों के संदर्भ में भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
