मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। ईरान और इज़राइल के बीच लेबनान को लेकर बढ़े सैन्य टकराव और बैलिस्टिक मिसाइल हमलों की खबरों ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में घबराहट पैदा कर दी है। इसका असर भारतीय शेयर बाजार, सोना-चांदी, कच्चे तेल और रुपये पर भी साफ दिखाई दिया।
शेयर बाजार में भारी गिरावट
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार भारी दबाव में खुला।
बीएसई सेंसेक्स में शुरुआती कारोबार के दौरान करीब 925 अंकों की तेज गिरावट दर्ज की गई। बाद में कुछ रिकवरी देखने को मिली, लेकिन बाजार पूरे दिन दबाव में बना रहा। खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स लगभग 800 अंकों की कमजोरी के साथ 73,471.78 के आसपास कारोबार कर रहा था।
वहीं निफ्टी 50 भी लाल निशान में कारोबार करता दिखाई दिया। शुक्रवार को 23,336.70 पर बंद हुआ निफ्टी सोमवार को लगभग 296 अंक गिरकर 23,070 तक पहुंच गया। बाद में कुछ सुधार के बाद यह 23,134 अंक के आसपास कारोबार करता रहा।
सोना और चांदी में बड़ी गिरावट
सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने और चांदी में भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
वायदा बाजार में सोना शुक्रवार को ₹1,55,594 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ था, लेकिन सोमवार को यह गिरकर ₹1,53,596 तक पहुंच गया। यानी सोने में लगभग ₹1,998 की गिरावट दर्ज की गई।
चांदी में इससे भी बड़ी कमजोरी देखने को मिली। शुक्रवार को ₹2,48,537 प्रति किलोग्राम पर बंद हुई चांदी सोमवार को गिरकर ₹2,41,990 तक पहुंच गई। इस तरह चांदी में ₹6,547 की भारी गिरावट दर्ज हुई।
इस गिरावट से कमोडिटी बाजार के निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ा।
कच्चे तेल में जबरदस्त उछाल
जहां शेयर बाजार और कीमती धातुओं में गिरावट रही, वहीं कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला।
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 3.31 डॉलर बढ़कर 96.40 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है।
डॉलर के मुकाबले रुपया हुआ कमजोर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती अनिश्चितता का असर भारतीय मुद्रा पर भी पड़ा।
सोमवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 29 पैसे कमजोर होकर 95.23 के स्तर से ऊपर पहुंच गया। रुपये की कमजोरी से आयात महंगा हो सकता है, जिससे पेट्रोल-डीजल, गैस और अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
महंगाई बढ़ने की आशंका
विश्लेषकों के अनुसार यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं और रुपया कमजोर रहता है, तो भारत में महंगाई बढ़ने का जोखिम पैदा हो सकता है।
ऊर्जा लागत बढ़ने से परिवहन, उत्पादन और उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ सकता है, जिसका सीधा प्रभाव आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव के दौरान बाजारों में अस्थिरता बढ़ना सामान्य बात है। ऐसे समय में निवेशकों को घबराहट में फैसले लेने से बचना चाहिए और लंबी अवधि की निवेश रणनीति पर ध्यान देना चाहिए।
मध्य पूर्व की स्थिति और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम आने वाले दिनों में शेयर बाजार, सोना, चांदी, तेल और मुद्रा बाजार की दिशा तय करेंगे।
