भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेशी मुद्रा बचाने की अपील के बाद निवेशकों में डर का माहौल बन गया। इसका असर बाजार पर साफ दिखाई दिया और BSE Sensex 1300 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि Nifty भी 23,850 के नीचे फिसल गया।
दिनभर के कारोबार में 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,312.91 अंक यानी 1.70 प्रतिशत गिरकर 76,015.28 पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 में भी करीब 1.5 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव तेल, ज्वेलरी, एविएशन और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों पर देखने को मिला।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल बना बड़ी वजह
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल रही। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण Brent Crude Oil की कीमत 104 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। इससे भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों की चिंता बढ़ गई है।
भारत अपनी करीब 85 प्रतिशत तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ता है, जिससे चालू खाता घाटा और महंगाई दोनों पर दबाव बढ़ सकता है।
पीएम मोदी की अपील से निवेशकों में चिंता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से ऊर्जा बचत, कम विदेशी यात्रा और एक साल तक सोना खरीदने से बचने की अपील की थी। सरकार की इस अपील को निवेशकों ने संभावित आर्थिक दबाव के संकेत के रूप में देखा। इसके बाद बाजार में बिकवाली तेज हो गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को लेकर चिंतित है। इसी वजह से ऊर्जा बचत और गैर-जरूरी आयात कम करने पर जोर दिया जा रहा है।
रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा
शेयर बाजार में गिरावट के साथ भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। रुपया 95.31 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो अब तक का सबसे कमजोर स्तर माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ते तेल आयात बिल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण रुपये पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा गिरावट?
सोमवार को बाजार में सबसे ज्यादा नुकसान ज्वेलरी कंपनियों, एविएशन, तेल विपणन कंपनियों और बैंकिंग शेयरों को हुआ। Titan, Reliance Industries और IndiGo जैसे बड़े शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर कुछ चुनिंदा शेयरों जैसे Hyundai Motor India और UPL में मजबूती देखने को मिली।
आगे क्या रहेगा बाजार का रुख?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं और पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहता है, तो भारतीय बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों की नजर अब वैश्विक घटनाक्रम, रुपये की चाल और सरकार की आर्थिक रणनीति पर बनी हुई है।
