वैश्विक बाजारों में सोमवार को सतर्क माहौल देखने को मिला। मिडिल ईस्ट में युद्धविराम वार्ता में जारी गतिरोध और इस सप्ताह आने वाले अमेरिकी महंगाई आंकड़ों के कारण निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। इसका असर ब्रिटिश मुद्रा पाउंड स्टर्लिंग पर भी पड़ा, जो डॉलर के मुकाबले कमजोर होता नजर आया। वहीं ब्रिटेन की घरेलू राजनीति में बढ़ती अनिश्चितताओं ने भी पाउंड पर अतिरिक्त दबाव बनाया।
सोमवार को शुरुआती कारोबार में GBP/USD करीब 0.18 प्रतिशत गिरकर 1.3609 पर पहुंच गया, जबकि यूरो भी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 1.1773 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। निवेशकों का फोकस अब मंगलवार को जारी होने वाले अमेरिकी Consumer Price Index (CPI) डेटा पर टिका हुआ है, जो आगे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
मिडिल ईस्ट तनाव से बढ़ी बाजार की बेचैनी
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की इस सप्ताह चीन यात्रा से पहले निवेशकों को उम्मीद थी कि मिडिल ईस्ट में युद्धविराम को लेकर कोई बड़ा समझौता हो सकता है। लेकिन सप्ताहांत में कोई ठोस प्रगति नहीं होने से बाजार की उम्मीदों को झटका लगा।
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए प्रस्ताव को “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताया, जिसके बाद बाजार में जोखिम लेने की भावना कमजोर पड़ गई। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई, जबकि इक्विटी बाजारों में दबाव देखने को मिला।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चीन की मध्यस्थता से कोई बड़ा समाधान नहीं निकलता, तो वैश्विक बाजार लंबे समय तक अनिश्चितता का सामना कर सकते हैं। इससे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं और वैश्विक महंगाई पर दबाव और बढ़ सकता है।
अमेरिकी CPI डेटा पर टिकी बाजार की नजर
इस सप्ताह का सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ा मंगलवार को जारी होने वाला अमेरिका का अप्रैल CPI डेटा माना जा रहा है। अनुमान है कि अमेरिका में हेडलाइन महंगाई दर बढ़कर 3.7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जो पहले 3.3 प्रतिशत थी। वहीं कोर इंफ्लेशन 2.6 प्रतिशत से बढ़कर 2.7 प्रतिशत रहने की संभावना है।
यदि महंगाई अपेक्षा से अधिक आती है, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस साल ब्याज दरों में कटौती की बजाय बढ़ोतरी पर विचार कर सकता है। इसी संभावना के चलते डॉलर को मजबूती मिल रही है।
इस सप्ताह फेडरल रिजर्व के कुछ प्रमुख अधिकारियों के बयान भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। इसके अलावा बुधवार को Producer Price Index (PPI) और गुरुवार को अमेरिकी Retail Sales डेटा जारी होगा।
ब्रिटेन की राजनीति से पाउंड पर दबाव
ब्रिटेन में हाल ही में हुए स्थानीय चुनावों के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। लेबर पार्टी के अंदर नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं फिर शुरू हो गई हैं। खासकर मैनचेस्टर के मेयर Andy Burnham को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं कि वह संसद में वापसी कर सकते हैं।
निवेशकों की नजर अब प्रधानमंत्री Keir Starmer के आगामी नीति भाषण पर है। विश्लेषकों के अनुसार यूरोपीय संघ के साथ ब्रिटेन के रिश्तों को लेकर कोई बड़ा संकेत बाजार को प्रभावित कर सकता है। खासकर यदि ब्रिटेन कस्टम यूनियन या सिंगल मार्केट में दोबारा शामिल होने की दिशा में कोई संकेत देता है, तो इसका असर पाउंड और बॉन्ड मार्केट दोनों पर पड़ सकता है।
यूरो पर भी दबाव बरकरार
यूरो को हाल के दिनों में कमजोर डॉलर और एशियाई बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों का कुछ फायदा मिला है। हालांकि यूरोजोन के कमजोर आर्थिक आंकड़ों के कारण यूरो की स्थिति अब भी मजबूत नहीं मानी जा रही।
विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) द्वारा इस गर्मी में ब्याज दर बढ़ाने की संभावना ही फिलहाल यूरो को बड़ी गिरावट से बचा रही है। बाजार में 11 जून की बैठक में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की संभावना करीब 82 प्रतिशत मानी जा रही है।
निवेशकों के लिए आगे क्या अहम?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन वैश्विक मुद्रा बाजार के लिए बेहद अहम रहेंगे। अमेरिकी महंगाई डेटा, फेड अधिकारियों के बयान, मिडिल ईस्ट संकट और ब्रिटेन की राजनीति – ये सभी फैक्टर डॉलर, पाउंड और यूरो की दिशा तय करेंगे।
यदि महंगाई उम्मीद से ज्यादा बढ़ती है और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो डॉलर में और मजबूती आ सकती है, जबकि पाउंड और यूरो पर दबाव बढ़ सकता है।
