बढ़ते हंटावायरस मामलों को लेकर अलर्ट, पब्लिक हेल्थ फोरम ने तैयारियों पर दिया जोर

दुनियाभर में बढ़ती हंटावायरस चिंताओं के बीच भारत में भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सतर्कता बढ़ाने की सलाह दी है। आंध्र प्रदेश में आयोजित एक पब्लिक हेल्थ फोरम में विशेषज्ञों ने कहा कि फिलहाल भारत में बड़े स्तर का खतरा नहीं है, लेकिन भविष्य में किसी भी संभावित संक्रमण को रोकने के लिए मजबूत निगरानी और तैयारियां बेहद जरूरी हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार हंटावायरस मुख्य रूप से संक्रमित चूहों और उनके मल-मूत्र या लार के संपर्क से फैलता है। यह वायरस सामान्य तौर पर इंसानों के बीच तेजी से नहीं फैलता, इसलिए इसे COVID-19 जैसी महामारी का खतरा नहीं माना जा रहा। हालांकि संक्रमित व्यक्ति में गंभीर फेफड़ों की बीमारी, किडनी फेलियर और सांस लेने में दिक्कत जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

क्या है हंटावायरस?

हंटावायरस एक दुर्लभ लेकिन खतरनाक वायरल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से कृंतकों यानी चूहों के जरिए फैलता है। लोग आमतौर पर संक्रमित चूहों की बीट, मूत्र या लार से दूषित धूल के संपर्क में आने पर संक्रमित होते हैं। बंद गोदामों, जहाजों, स्टोर रूम और खराब वेंटिलेशन वाले स्थानों में इसका खतरा ज्यादा माना जाता है।

भारत में कितना बड़ा खतरा?

ICMR और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल भारत में हंटावायरस का व्यापक संक्रमण नहीं देखा गया है। हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय क्रूज शिप पर दो भारतीय नागरिकों में संक्रमण मिलने के बाद निगरानी बढ़ाई गई है, लेकिन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि देश के लिए तत्काल कोई बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरा नहीं है।

विशेषज्ञों ने कहा कि भारत में खराब स्वच्छता, बाढ़, कचरा प्रबंधन की समस्याएं और भीड़भाड़ वाले इलाकों में भविष्य में जोखिम बढ़ सकता है। खासकर मानसून के दौरान चूहों की संख्या बढ़ने से संक्रमण फैलने की संभावना अधिक हो सकती है।

पब्लिक हेल्थ फोरम ने क्या कहा?

आंध्र प्रदेश में आयोजित स्वास्थ्य फोरम में विशेषज्ञों ने सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियों से कई महत्वपूर्ण कदम उठाने की मांग की। इनमें शामिल हैं:

  • चूहों और कृंतकों की निगरानी बढ़ाना
  • अस्पतालों में शुरुआती जांच सुविधाएं मजबूत करना
  • ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाना
  • बंद और गंदे स्थानों की सफाई के दौरान सुरक्षा उपाय अपनाना
  • वायरस निगरानी नेटवर्क को और मजबूत बनाना

विशेषज्ञों ने कहा कि भारत के पास 165 से अधिक वायरल रिसर्च और डायग्नोस्टिक लैब नेटवर्क मौजूद हैं, जिनके जरिए संदिग्ध मामलों की जांच की जा सकती है।

हंटावायरस के प्रमुख लक्षण

हंटावायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे ही होते हैं, जिससे इसकी पहचान मुश्किल हो सकती है। इनमें शामिल हैं:

  • तेज बुखार
  • सिरदर्द
  • शरीर और मांसपेशियों में दर्द
  • थकान
  • उल्टी और मतली
  • सांस लेने में परेशानी

गंभीर मामलों में मरीज के फेफड़ों में पानी भर सकता है और किडनी प्रभावित हो सकती है।

कैसे करें बचाव?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक साफ-सफाई और चूहों से दूरी बनाए रखना सबसे प्रभावी बचाव है। लोगों को सलाह दी गई है कि बंद कमरों को खोलकर हवा लगाएं, चूहों की बीट को सूखे झाड़ू से साफ न करें और सफाई के दौरान ग्लव्स तथा डिसइंफेक्टेंट का इस्तेमाल करें।

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