सुरत Special Economic Zone में हीरों का बड़ा घोटाला उजागर: DRI ने पकड़ा ₹1174 करोड़ का रैकेट, ₹65 करोड़ ड्यूटी चोरी का आरोप

सूरत के डायमंड उद्योग से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है। Directorate of Revenue Intelligence (DRI) ने Surat Special Economic Zone (SurSEZ) में कथित तौर पर चल रहे पॉलिश्ड डायमंड आयात रैकेट का भंडाफोड़ किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए ड्यूटी-फ्री आयात किए गए महंगे प्राकृतिक हीरों को घरेलू बाजार में बेच दिया जाता था, जबकि निर्यात में कम गुणवत्ता वाले नकली या सस्ते पत्थरों का इस्तेमाल कर सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया।

जांच के दौरान DRI ने नवसारी निवासी मोंटू गांधी को गिरफ्तार किया है। एजेंसी का दावा है कि वह इस पूरे नेटवर्क का अहम हिस्सा था। मामला Sachin स्थित SurSEZ के Diamond Park में काम कर रही कंपनी M/s Shree Naklang Jewellers से जुड़ा है।

कैसे चलता था पूरा रैकेट?

DRI के अनुसार कंपनी को SEZ नियमों के तहत प्राकृतिक हीरों से जड़ी सिल्वर ज्वेलरी बनाने की अनुमति मिली हुई थी। SEZ यूनिट्स को निर्यात बढ़ाने के लिए ड्यूटी-फ्री आयात की सुविधा दी जाती है, लेकिन आरोप है कि इस सुविधा का गलत फायदा उठाया गया।

जांच में सामने आया कि कंपनी उच्च गुणवत्ता वाले कट और पॉलिश्ड डायमंड्स ड्यूटी-फ्री आयात करती थी। इसके बाद इन हीरों को घरेलू बाजार में डायवर्ट कर दिया जाता था। निर्यात किए जाने वाले ज्वेलरी पार्सल में असली हीरों की जगह कम गुणवत्ता वाले डायमंड, Cubic Zirconia, Moissanite और अन्य नकली स्टोन लगाए जाते थे, जबकि दस्तावेजों में उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले प्राकृतिक हीरे बताया जाता था।

₹134 करोड़ घोषित, असली कीमत निकली सिर्फ ₹4.93 करोड़

DRI अधिकारियों ने 28 जनवरी को SurSEZ के स्ट्रॉन्ग रूम में रखे 20 निर्यात पार्सलों की जांच की। इन पार्सलों को 92.5% कट और पॉलिश्ड डायमंड जड़ी सिल्वर ज्वेलरी बताया गया था और इनकी घोषित कीमत ₹134.23 करोड़ थी।

लेकिन जब वैल्यूएशन कराया गया तो असली कीमत मात्र ₹4.93 करोड़ निकली, जो घोषित मूल्य का केवल 3.68% थी। इस आधार पर DRI ने करीब ₹65 करोड़ की कस्टम ड्यूटी चोरी का अनुमान लगाया है।

उत्पादन क्षमता से तीन गुना ज्यादा निर्यात

जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी को सालाना 8.150 किलो सिल्वर ज्वेलरी उत्पादन की अनुमति थी, लेकिन FY 2025-26 में कंपनी ने 24 किलो से अधिक सिल्वर ज्वेलरी एक्सपोर्ट कर दी। यह अधिकृत क्षमता से लगभग तीन गुना ज्यादा है। इसी विसंगति के बाद एजेंसियों को संदेह हुआ और पूरे नेटवर्क की जांच शुरू की गई।

₹1174 करोड़ तक पहुंची जांच

DRI के अनुसार अब तक की जांच में संदिग्ध आयात का कुल मूल्य लगभग ₹1174 करोड़ तक पहुंच चुका है। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि क्या इस नेटवर्क में अन्य कंपनियां, विदेशी सप्लायर और हवाला चैनल भी शामिल थे।

इससे पहले भी अप्रैल 2026 में DRI ने दुबई से SurSEZ में आए 16 संदिग्ध पार्सलों को जब्त किया था। उस समय भी दस्तावेजों और वास्तविक माल के बीच भारी अंतर मिलने की बात सामने आई थी।

डायमंड इंडस्ट्री पर बढ़ सकता है दबाव

सूरत दुनिया का सबसे बड़ा डायमंड कटिंग और पॉलिशिंग हब माना जाता है। ऐसे में इस तरह के मामलों से पूरे उद्योग की अंतरराष्ट्रीय साख पर असर पड़ सकता है। हाल ही में SEZ में पॉलिश्ड डायमंड आयात में 600% से अधिक वृद्धि ने भी उद्योग और एजेंसियों का ध्यान खींचा था। कई उद्योग विशेषज्ञों ने तब भी अनियमितताओं की आशंका जताई थी।

अब माना जा रहा है कि केंद्र सरकार और कस्टम विभाग SEZ यूनिट्स की निगरानी और सख्त कर सकते हैं। साथ ही डायमंड आयात-निर्यात से जुड़े नियमों की समीक्षा भी संभव है।

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