सूरत बना डायमंड ट्रेड का ग्लोबल हब, अब भारत के 80% रफ डायमंड सीधे हो रहे इम्पोर्ट

भारत के हीरा उद्योग के लिए सूरत एक बार फिर चर्चा में है। अब देश में आयात होने वाले लगभग 80 प्रतिशत रफ डायमंड सीधे सूरत में इम्पोर्ट किए जा रहे हैं। पहले जहां मुंबई इस कारोबार का मुख्य केंद्र माना जाता था, वहीं अब सूरत तेजी से ग्लोबल डायमंड ट्रेड हब बनता जा रहा है। हीरा उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव गुजरात के डायमंड सेक्टर के लिए ऐतिहासिक साबित हो सकता है।

सूरत एयरपोर्ट और डायमंड बोर्स का बड़ा योगदान

सूरत में विश्व की सबसे बड़ी ऑफिस बिल्डिंग कही जाने वाली ‘सूरत डायमंड बोर्स’ के शुरू होने के बाद डायमंड कारोबार को नई रफ्तार मिली है। इसके साथ ही सूरत एयरपोर्ट पर अंतरराष्ट्रीय कार्गो सुविधाओं में सुधार होने से विदेशी कंपनियां अब सीधे सूरत को प्राथमिकता दे रही हैं।

जानकारों के मुताबिक, बेल्जियम, यूएई, अफ्रीका और रूस जैसे देशों से आने वाले रफ डायमंड अब बड़ी मात्रा में सीधे सूरत पहुंच रहे हैं। इससे मुंबई पर निर्भरता कम हुई है और व्यापारियों का समय व लॉजिस्टिक लागत दोनों घटे हैं।

भारत के डायमंड कारोबार में सूरत की मजबूत पकड़

सूरत दुनिया के लगभग 90 प्रतिशत छोटे हीरों की कटिंग और पॉलिशिंग करता है। लाखों कारीगर इस उद्योग से जुड़े हुए हैं। अब रफ डायमंड का सीधा आयात बढ़ने से स्थानीय उद्योग को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इससे:

  • आयात प्रक्रिया तेज होगी
  • ट्रांसपोर्ट खर्च कम होगा
  • रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे
  • निर्यात प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी

ग्लोबल मार्केट में भारत की बढ़ती ताकत

हाल के वर्षों में लैब ग्रोन डायमंड और प्राकृतिक हीरों की मांग में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। इसके बावजूद सूरत ने अपनी मजबूत सप्लाई चेन और आधुनिक टेक्नोलॉजी के दम पर वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी है।

सरकार भी गुजरात को ग्लोबल जेम्स एंड ज्वेलरी हब बनाने की दिशा में कई योजनाओं पर काम कर रही है। आने वाले समय में सूरत का डायमंड कारोबार और तेज गति से बढ़ सकता है।

डायमंड उद्योग के सामने चुनौतियां भी बरकरार

हालांकि उद्योग जगत का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, अमेरिका और चीन के बाजार में मांग में कमी तथा सिंथेटिक डायमंड की बढ़ती लोकप्रियता जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। फिर भी सीधे आयात की बढ़ती हिस्सेदारी को उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

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