भारत के टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय (Ministry of Textiles) और इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस (ICRIER) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य टेक्सटाइल सेक्टर में डेटा आधारित और रिसर्च आधारित नीतियां तैयार करना है, जिससे उद्योग को तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप मजबूत बनाया जा सके।
नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में इस समझौते पर वस्त्र मंत्रालय के डिप्टी डायरेक्टर जनरल अखिलेश कुमार और ICRIER के डायरेक्टर एवं CEO डॉ. शेखर अय्यर ने हस्ताक्षर किए। सरकार का मानना है कि टेक्सटाइल सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था, निर्यात और रोजगार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसे भविष्य के लिए तैयार करने हेतु डेटा और रिसर्च का सहारा लेना जरूरी हो गया है।
टेक्सटाइल सेक्टर के लिए क्यों अहम है यह साझेदारी?
भारत का टेक्सटाइल उद्योग देश के सबसे बड़े रोजगार देने वाले क्षेत्रों में शामिल है। यह सेक्टर लाखों लोगों को रोजगार देता है और निर्यात में भी बड़ा योगदान रखता है। ऐसे में बदलते वैश्विक व्यापार, नई तकनीकों, मैन-मेड फाइबर (MMF), टेक्निकल टेक्सटाइल और सस्टेनेबिलिटी जैसे मुद्दों को ध्यान में रखते हुए सरकार अब “एविडेंस बेस्ड पॉलिसी” पर फोकस कर रही है।
इस समझौते के तहत ICRIER टेक्सटाइल मंत्रालय को रिसर्च सपोर्ट, डेटा एनालिटिक्स, मार्केट ट्रेंड स्टडी और पॉलिसी फॉर्मुलेशन में मदद करेगा। इससे सरकार को उद्योग से जुड़े फैसले लेने में अधिक सटीक और वास्तविक आंकड़ों का सहयोग मिलेगा।
टेक्सटाइल डेटा सिस्टम होगा और मजबूत
सरकार पहले ही Tex-RAMPS जैसी योजनाओं के जरिए टेक्सटाइल डेटा सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। अब ICRIER की भागीदारी से टेक्सटाइल सेक्टर में उत्पादन, निर्यात, रोजगार, क्लस्टर डेवलपमेंट और निवेश से जुड़ा डेटा और अधिक विश्वसनीय बनेगा। इससे केंद्र और राज्य सरकारों को उद्योग से जुड़े फैसले लेने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अगर 2030 तक टेक्सटाइल सेक्टर को 250 से 350 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंचाना चाहता है, तो रिसर्च और डेटा आधारित नीति निर्माण बेहद जरूरी होगा।
टेक्निकल टेक्सटाइल और इनोवेशन पर रहेगा फोकस
यह साझेदारी टेक्निकल टेक्सटाइल, सस्टेनेबल फैब्रिक, रिसाइक्लिंग, मैन-मेड फाइबर और नई टेक्नोलॉजी आधारित उत्पादन पर भी फोकस करेगी। इससे भारतीय टेक्सटाइल कंपनियों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही MSME यूनिट्स और टेक्सटाइल क्लस्टर्स को भी नई नीतियों का लाभ मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का कहना है कि रिसर्च आधारित नीति से भारत का टेक्सटाइल सेक्टर चीन, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों को कड़ी टक्कर दे सकता है।
उद्योग को क्या होगा फायदा?
- टेक्सटाइल निर्यात को मिलेगा बढ़ावा
- डेटा आधारित नीति निर्माण होगा आसान
- निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा
- टेक्निकल टेक्सटाइल और MMF सेक्टर को मजबूती
- रोजगार और स्किल डेवलपमेंट में तेजी
- वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की हिस्सेदारी बढ़ेगी
भारत सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर टेक्सटाइल सप्लाई चेन तेजी से बदल रही है और कंपनियां नए मैन्युफैक्चरिंग हब तलाश रही हैं। ऐसे में भारत खुद को एक बड़े टेक्सटाइल और अपैरल हब के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।
