देश में चीनी उद्योग एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में पहुंच गया है। केंद्र सरकार द्वारा 30 सितंबर तक चीनी निर्यात पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाने के फैसले ने उद्योग जगत, किसानों और निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी है। इस फैसले के बाद गुरुवार को कई चीनी कंपनियों के शेयरों में 7 प्रतिशत तक की तेज गिरावट दर्ज की गई।
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब कुछ ही समय पहले अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी निर्यात को मंजूरी दी गई थी। ऐसे में अचानक लगाया गया प्रतिबंध उद्योग के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
क्यों लगाया गया चीनी निर्यात पर प्रतिबंध?
सरकार का कहना है कि:
- घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों को नियंत्रित करना जरूरी है
- आने वाले महीनों में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना आवश्यक है
- उत्पादन में संभावित गिरावट को देखते हुए निर्यात सीमित करना जरूरी हो गया था
हाल के सप्ताहों में चीनी के खुदरा दाम:
- ₹35-36 प्रति किलो से बढ़कर
- ₹38-40 प्रति किलो तक पहुंच गए हैं
विशेषज्ञों के मुताबिक यह तेजी:
- कम क्लोजिंग स्टॉक
- कमजोर उत्पादन अनुमान
- बढ़ती मांग
के कारण देखने को मिली है।
उत्पादन अनुमान घटने से बढ़ी चिंता
उद्योग सूत्रों के अनुसार 2025-26 चीनी सीजन (अक्टूबर से सितंबर) में:
- कुल चीनी उत्पादन लगभग 27.95 मिलियन टन रहने का अनुमान है
- पहले यह अनुमान करीब 29 मिलियन टन था
इसके अलावा:
- क्लोजिंग स्टॉक 3.8 से 3.9 मिलियन टन रहने का अनुमान है
- जबकि पिछले साल यह करीब 5 मिलियन टन था
यानी बाजार में उपलब्ध अतिरिक्त स्टॉक तेजी से कम हो रहा है।
क्या सरकार का फैसला कीमतें नियंत्रित कर पाएगा?
विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है।
कुछ जानकारों का मानना है कि:
- निर्यात रोकने से घरेलू सप्लाई बढ़ेगी
- कीमतों पर दबाव कम होगा
- त्योहारों से पहले बाजार स्थिर रह सकता है
लेकिन उद्योग से जुड़े कई लोग इससे सहमत नहीं हैं।
उनका कहना है कि:
- निर्यात रोकने से अधिकतम 2 लाख टन चीनी ही बच पाएगी
- इससे कुल सप्लाई पर बहुत बड़ा असर नहीं पड़ेगा
- कीमतों में स्थायी राहत मिलना मुश्किल है
किसानों पर पड़ सकता है असर
कई विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय में इस फैसले का सबसे बड़ा असर गन्ना किसानों पर पड़ सकता है।
यदि:
- मिलों की कमाई घटती है
- निर्यात ऑर्डर रुकते हैं
- वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा कम होती है
तो इसका असर किसानों को मिलने वाले भुगतान पर भी पड़ सकता है।
विदेशी खरीदारों के साथ बनेगी मुश्किल
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने सरकार के फैसले पर चिंता जताई है।
एसोसिएशन का कहना है कि:
- कई चीनी मिलों ने पहले ही विदेशी खरीदारों से अनुबंध किए हुए हैं
- अचानक प्रतिबंध से अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है
- पहले से हुए समझौतों को पूरा करने की अनुमति दी जानी चाहिए
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत अचानक निर्यात रोकता है तो:
- वैश्विक खरीदार दूसरे देशों की ओर रुख कर सकते हैं
- भारतीय निर्यातकों की छवि प्रभावित हो सकती है
पहले कितनी निर्यात मंजूरी मिली थी?
खाद्य मंत्रालय ने पहले:
- 1.5 मिलियन टन चीनी निर्यात की मंजूरी दी थी
इसके बाद:
- अतिरिक्त 5 लाख टन निर्यात को भी मंजूरी दी गई
हालांकि:
- इनमें से केवल 87,587 टन निर्यात की वास्तविक स्वीकृति जारी हुई थी
अब अचानक पूर्ण प्रतिबंध ने उद्योग को चौंका दिया है।
शेयर बाजार में शुगर कंपनियों को झटका
सरकार के फैसले के बाद शेयर बाजार में चीनी कंपनियों के स्टॉक्स पर दबाव देखने को मिला।
कई प्रमुख शुगर कंपनियों के शेयर:
- 5% से 7% तक टूट गए
- निवेशकों में घबराहट दिखी
- निर्यात आधारित कंपनियों पर ज्यादा असर पड़ा
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार को अब सरकार की आगे की नीति का इंतजार रहेगा।
वैश्विक बाजार पर भी असर संभव
भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादकों और निर्यातकों में शामिल है।
ऐसे में भारत के फैसले का असर:
- वैश्विक चीनी कीमतों
- एशियाई बाजार
- अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन
पर भी पड़ सकता है।
यदि प्रतिबंध लंबे समय तक जारी रहा तो:
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ सकती हैं
- ब्राजील और थाईलैंड जैसे देशों को फायदा मिल सकता है
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले महीनों में सरकार:
- घरेलू कीमतों की समीक्षा
- उत्पादन स्थिति
- मानसून और फसल अनुमान
- त्योहारों की मांग
को देखकर आगे फैसला ले सकती है।
यदि उत्पादन बेहतर रहता है तो:
- निर्यात पर कुछ राहत दी जा सकती है
- आंशिक निर्यात को मंजूरी मिल सकती है
लेकिन फिलहाल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
