Donald Trump Voting Machine Controversy: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump एक बार फिर चुनावी विवादों को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप के करीबी सलाहकारों और चुनाव सुरक्षा टीम ने 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के बाद अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली वोटिंग मशीनों को बदलने और कुछ मशीनों पर प्रतिबंध लगाने की रणनीति तैयार की थी।
बताया जा रहा है कि यह योजना राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर लागू करने की कोशिश की जा रही थी। हालांकि, चुनाव विशेषज्ञों और कई जांच एजेंसियों ने पहले ही चुनाव में धांधली के दावों को खारिज कर दिया था।
वोटिंग मशीनों को लेकर क्या थी योजना?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप के कानूनी सलाहकार Kurt Olsen ने उन इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को निशाने पर लेने की योजना बनाई थी जिन्हें Dominion Voting Systems कंपनी बनाती है।
ट्रंप समर्थकों ने 2020 के चुनाव में बार-बार आरोप लगाया था कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के जरिए चुनाव परिणाम प्रभावित किए गए। हालांकि, अदालतों, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और अमेरिकी एजेंसियों ने इन आरोपों को निराधार बताया था।
राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देने की तैयारी
बताया जा रहा है कि ट्रंप खेमे की योजना थी कि वोटिंग मशीनों को “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा” घोषित किया जाए। इसके बाद संघीय एजेंसियों के जरिए चुनाव प्रणाली में हस्तक्षेप करने की रणनीति बनाई जा रही थी।
हालांकि, अमेरिकी संविधान के तहत चुनाव करवाने का अधिकार राज्यों और स्थानीय प्रशासन के पास होता है। इसी वजह से संघीय स्तर पर चुनावी नियंत्रण हासिल करना आसान नहीं माना जाता।
मैन्युअल वोट गिनती लागू करने की मांग
रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि ट्रंप समर्थक इलेक्ट्रॉनिक मशीनों की जगह बैलेट पेपर की मैन्युअल गिनती प्रणाली लागू करना चाहते थे।
लेकिन चुनाव विशेषज्ञों का कहना है कि:
- मैन्युअल काउंटिंग में अधिक समय लगता है
- मानवीय गलती की संभावना बढ़ जाती है
- बड़े स्तर पर चुनाव प्रबंधन मुश्किल हो सकता है
अमेरिका के अधिकांश राज्यों में वर्तमान में इलेक्ट्रॉनिक मशीनों के साथ पेपर रिकॉर्ड रखने वाली प्रणाली लागू है, जिसे अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है।
चुनाव नियंत्रण को लेकर बढ़ी चिंता
विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल वोटिंग मशीनों तक सीमित नहीं था, बल्कि चुनावी प्रक्रिया पर अधिक नियंत्रण स्थापित करने की बड़ी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा था।
आलोचकों का आरोप है कि यदि संघीय सरकार को चुनावी प्रक्रियाओं पर अधिक अधिकार मिल जाते, तो इससे राज्यों की स्वतंत्र चुनाव व्यवस्था प्रभावित हो सकती थी।
2020 चुनाव विवाद अब भी चर्चा में
गौरतलब है कि 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में Joe Biden ने डोनाल्ड ट्रंप को हराया था। चुनाव के बाद ट्रंप ने कई बार चुनाव में धांधली के आरोप लगाए, लेकिन अमेरिकी अदालतों और जांच एजेंसियों को इसके ठोस सबूत नहीं मिले।
इसके बावजूद वोटिंग मशीनों और चुनावी सुरक्षा को लेकर अमेरिका में राजनीतिक बहस अब भी जारी है।
