वैश्विक मुद्रा बाजार में शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर छह सप्ताह के उच्च स्तर के करीब स्थिर बना रहा, जबकि निवेशकों की नजर ईरान से जुड़ी कूटनीतिक वार्ताओं और मध्य-पूर्व तनाव पर टिकी रही। दूसरी ओर जापान का येन कमजोर पड़ा, क्योंकि देश के नरम उपभोक्ता महंगाई आंकड़ों (CPI) ने बैंक ऑफ जापान (BOJ) की संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीदों को कमजोर कर दिया।
विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स मजबूत स्तर पर बना रहा। निवेशकों को उम्मीद है कि यदि ईरान के साथ तनाव कम होता है तो वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की धारणा मजबूत हो सकती है। हालांकि, ऊर्जा आपूर्ति और तेल कीमतों को लेकर अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है।
ईरान वार्ता और तेल संकट पर बाजार की नजर
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक चर्चाओं का असर केवल भू-राजनीतिक स्थिति पर ही नहीं बल्कि मुद्रा बाजार, तेल कीमतों और निवेशकों की जोखिम क्षमता पर भी पड़ रहा है। यदि वार्ताएं सफल रहती हैं तो क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी आ सकती है, जिससे वैश्विक महंगाई दबाव कुछ कम होगा।
हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य-पूर्व में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश विकल्पों और डॉलर जैसी मजबूत मुद्राओं की ओर झुकाव बनाए हुए हैं।
कमजोर जापानी CPI से दबाव में येन
जापान के हालिया महंगाई आंकड़े अनुमान से कमजोर रहे, जिससे यह संकेत मिला कि बैंक ऑफ जापान निकट भविष्य में ब्याज दरों में बढ़ोतरी को टाल सकता है। इसका असर जापानी येन पर साफ दिखाई दिया और डॉलर के मुकाबले येन में गिरावट दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि जापान में उपभोक्ता मांग अभी भी दबाव में है और आर्थिक सुधार की गति कमजोर बनी हुई है। ऐसे में BOJ फिलहाल मौद्रिक नीति को सख्त करने से बच सकता है।
निवेशकों की रणनीति में बदलाव
मुद्रा बाजार में निवेशक फिलहाल अमेरिकी फेडरल रिजर्व, मध्य-पूर्व संकट और वैश्विक महंगाई के संकेतकों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। मजबूत डॉलर का असर उभरते बाजारों की मुद्राओं पर भी देखा जा सकता है, जिसमें भारतीय रुपया भी शामिल है।
विशेषज्ञों के मुताबिक यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं और डॉलर मजबूत होता है तो एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ सकता है।
वैश्विक बाजारों में सतर्क माहौल
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में फिलहाल सतर्कता का माहौल बना हुआ है। निवेशक किसी बड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रम या केंद्रीय बैंकों के संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और येन की कमजोरी फिलहाल बाजार की सबसे बड़ी चर्चा बनी हुई है।
