ईरान युद्ध के बीच रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया, डॉलर के मुकाबले 96.20 तक गिरा

भारत की मुद्रा रुपये पर पश्चिम एशिया में जारी तनाव का बड़ा असर देखने को मिल रहा है। सोमवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 96.20 पर पहुंच गया। यह पिछले बंद स्तर की तुलना में करीब 0.2 प्रतिशत की गिरावट है। ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से रुपया अब तक करीब 5.5 प्रतिशत कमजोर हो चुका है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।

पिछले सप्ताह पहली बार रुपया 96 प्रति डॉलर के स्तर के पार गया था। शुक्रवार को कारोबार के दौरान यह 96.14 तक फिसला और अंत में 95.97 पर बंद हुआ था। अब सोमवार को नई रिकॉर्ड गिरावट ने बाजार में बेचैनी और बढ़ा दी है।

कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाया दबाव

रुपये में गिरावट का सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी माना जा रहा है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 111 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर हमले की खबरों के बाद वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उछाल देखा गया।

इसके अलावा अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई पर चर्चा की खबरों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। युद्ध और तेल संकट के चलते डॉलर की मांग वैश्विक स्तर पर बढ़ रही है, जिसका सीधा असर भारतीय रुपये पर पड़ रहा है।

बढ़ती महंगाई और आयात बिल का खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये की कमजोरी से भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में डॉलर मजबूत होने और रुपये कमजोर पड़ने से पेट्रोल-डीजल, गैस और अन्य आयातित वस्तुएं महंगी हो सकती हैं।

Enrich Money के CEO Ponmudi R के अनुसार,
“भू-राजनीतिक अनिश्चितता और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ा दबाव डॉलर की मांग को बढ़ा रहा है। रुपये के 96 के पार जाने से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है क्योंकि इससे महंगाई, आयात लागत और आर्थिक विकास पर असर पड़ सकता है।”

शेयर बाजार में भी भारी गिरावट

रुपये की रिकॉर्ड गिरावट का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। सोमवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।

  • Nifty50 करीब 247 अंक गिरकर 23,396 पर खुला
  • Sensex लगभग 808 अंक टूटकर 74,430 पर पहुंच गया

निवेशक फिलहाल वैश्विक तनाव और बढ़ते आर्थिक जोखिमों को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं।

RBI और सरकार ने उठाए कदम

रुपये की गिरावट को रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और सरकार ने कुछ अहम कदम उठाए हैं। सरकार ने सोना और चांदी के आयात पर नियंत्रण बढ़ाया है। सप्ताहांत में चांदी के अधिकांश आयातों पर रोक लगाने जैसे फैसले लिए गए।

वहीं RBI ने विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करते हुए बैंकों की नेट ओपन पोजिशन से जुड़े नियम भी सख्त किए हैं, ताकि डॉलर की अत्यधिक मांग को नियंत्रित किया जा सके।

आगे और बढ़ सकता है दबाव

JP Morgan के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आने वाले दिनों में भारत पर “Balance of Payments” का दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में रुपये में और गिरावट, विदेशी मुद्रा भंडार के इस्तेमाल और पूंजी प्रवाह को बढ़ाने जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं।

करेंसी ट्रेडर्स का मानना है कि इस सप्ताह भी रुपये पर दबाव बना रह सकता है। अब बाजार की नजर RBI के अगले कदमों पर टिकी हुई है। यदि केंद्रीय बैंक आक्रामक हस्तक्षेप नहीं करता, तो रुपये में गिरावट और तेज हो सकती है।

आम लोगों पर क्या होगा असर?

रुपये की कमजोरी का असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है।

  • पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं
  • हवाई यात्रा और आयातित इलेक्ट्रॉनिक सामान की कीमत बढ़ सकती है
  • विदेश में पढ़ाई और यात्रा का खर्च बढ़ सकता है
  • महंगाई में फिर तेजी आ सकती है

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबा चलता है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका असर और गहरा हो सकता है।

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