तमिलनाडु का औद्योगिक शहर Coimbatore सिर्फ टेक्सटाइल और उद्योगों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने अनोखे संग्रहालयों के लिए भी जाना जाता है। यहां मौजूद कई म्यूजियम शहर के इतिहास, प्रकृति, ऑटोमोबाइल और टेक्सटाइल विरासत को बेहद खास तरीके से संजोए हुए हैं। हाल के वर्षों में ये संग्रहालय फिर से पर्यटकों और स्थानीय लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं।

123 साल पुराना गास फॉरेस्ट म्यूजियम आज भी खास
Gass Forest Museum भारत के सबसे पुराने प्राकृतिक इतिहास संग्रहालयों में गिना जाता है। इसकी स्थापना 1902 में ब्रिटिश दौर में H.A. Gass ने की थी। यह संग्रहालय 10,000 से ज्यादा दुर्लभ प्रदर्शनों का घर है, जिनमें संरक्षित वन्यजीव, कीट, लकड़ी के नमूने, जीवाश्म और जनजातीय वस्तुएं शामिल हैं।

यह म्यूजियम अपने ब्रिटिश-गॉथिक आर्किटेक्चर और विशाल वन्यजीव प्रदर्शनों के लिए प्रसिद्ध है। यहां 1000 किलो वजनी स्टफ्ड भारतीय बाइसन, दुर्लभ पक्षियों के नमूने और 458 साल पुराने ओक पेड़ का क्रॉस-सेक्शन भी देखने को मिलता है।

स्थानीय लोगों के बीच यह जगह “कोयंबटूर का छिपा हुआ रत्न” मानी जाती है। Reddit यूजर्स ने भी इसकी हरियाली और शांत माहौल की खूब तारीफ की है।

गीडी कार म्यूजियम में दिखती है ऑटोमोबाइल की शानदार विरासत
Gedee Car Museum कार प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। यहां 100 साल पुराने विंटेज वाहनों से लेकर आधुनिक रेसिंग कारों तक का अनोखा संग्रह मौजूद है। संग्रहालय में 1886 Benz Patent Motorwagen की प्रतिकृति भी रखी गई है, जिसे दुनिया की पहली कार माना जाता है।
यह संग्रहालय GD Charitable Trust के निजी कलेक्शन पर आधारित है और यहां जापान, जर्मनी, फ्रांस, अमेरिका और ब्रिटेन से लाई गई दुर्लभ कारें प्रदर्शित की गई हैं। सोशल मीडिया और Reddit पर लोग इसे भारत के बेहतरीन कार म्यूजियम्स में से एक बता रहे हैं।

टेक्सटाइल और विज्ञान से जुड़े संग्रहालय भी आकर्षण का केंद्र
कोयंबटूर को “दक्षिण भारत का मैनचेस्टर” कहा जाता है, इसलिए यहां टेक्सटाइल इंडस्ट्री से जुड़े संग्रहालय भी शहर की पहचान का अहम हिस्सा हैं। कई म्यूजियम्स में पुराने कपड़ा उद्योग उपकरण, मशीनें और औद्योगिक विकास की कहानी को प्रदर्शित किया गया है।

इसके अलावा शहर में विज्ञान, उद्योग और तकनीकी नवाचार से जुड़े संग्रहालय भी मौजूद हैं, जो छात्रों और रिसर्चर्स के लिए उपयोगी माने जाते हैं।
पर्यटन और विरासत संरक्षण को मिल रहा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि कोयंबटूर के ये संग्रहालय सिर्फ पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि दक्षिण भारत की सांस्कृतिक और औद्योगिक विरासत के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। हालांकि कुछ संग्रहालयों को रखरखाव और संरक्षण की जरूरत भी महसूस की जा रही है। हाल ही में एक रिपोर्ट में गास फॉरेस्ट म्यूजियम की खराब स्थिति और संरक्षण की जरूरत पर चिंता जताई गई थी।

इन संग्रहालयों की बढ़ती लोकप्रियता यह दिखाती है कि लोग अब सिर्फ आधुनिक मनोरंजन ही नहीं, बल्कि इतिहास, प्रकृति और विरासत से जुड़ी जगहों में भी दिलचस्पी ले रहे हैं।


