$2 बिलियन डील के तहत अडानी विल्मर से पूरी तरह बाहर होगी

अडानी एंटरप्राइजेज $2 बिलियन डील के तहत अडानी विल्मर से पूरी तरह बाहर होगी

डानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) ने घोषणा की है कि वह अडानी विल्मर लिमिटेड (AWL) में अपनी 44% हिस्सेदारी पूरी तरह से बेच देगी। यह हिस्सेदारी दो चरणों में बेची जाएगी: पहला चरण विल्मर इंटरनेशनल की सहायक कंपनी Lence Pte Ltd को 31.06% हिस्सेदारी बेचने का है, और दूसरा चरण लगभग 13% हिस्सेदारी सार्वजनिक शेयरधारिता मानदंडों को पूरा करने के लिए बेचा जाएगा। यह लेनदेन कॉल या पुट विकल्प के माध्यम से किया जाएगा, जिसके लिए समझौता 30 दिसंबर 2024 को साइन किया गया।

डील की मुख्य बातें

  1. पहला चरण:
    • अडानी एंटरप्राइजेज और इसकी सहायक कंपनी अडानी कमोडिटीज LLP (ACL) ने Lence Pte Ltd के साथ एक समझौता किया है।
    • इसके तहत, Lence Pte Ltd AWL की 31.06% इक्विटी हिस्सेदारी खरीदेगी।
  2. दूसरा चरण:
    • लगभग 13% हिस्सेदारी न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता मानदंडों को पूरा करने के लिए बेची जाएगी।
  3. नाम बदलने की योजना:
    • समझौते के तहत, AWL का नाम बदलने की योजना बनाई गई है। संभावित विकल्पों में AWL Limited, AWL Agri Business Limited, या Fortune Agri Business Limited शामिल हैं।
    • अंतिम नाम को कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय से मंजूरी की आवश्यकता होगी।

अडानी विल्मर का बाजार पूंजीकरण और शेयर प्रदर्शन

  • 27 दिसंबर 2024 तक, अडानी विल्मर का बाजार पूंजीकरण लगभग ₹42,785 करोड़ ($5 बिलियन) था।
  • घोषणा के बाद, अडानी एंटरप्राइजेज के शेयर 7% बढ़कर ₹2,585 पर बंद हुए।
  • वहीं, अडानी विल्मर के शेयरों में 1.81% की गिरावट आई और यह ₹323.25 प्रति शेयर पर बंद हुआ।

फंड का उपयोग और आगे की रणनीति

  • अडानी एंटरप्राइजेज ने संकेत दिया है कि इस हिस्सेदारी की बिक्री से प्राप्त फंड का उपयोग कंपनी के मुख्य व्यवसाय क्षेत्रों में किया जाएगा, जिनमें ऊर्जा, यूटिलिटी, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश शामिल है।
  • यह कदम कंपनी की महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में अपनी स्थिति को मजबूत करने की रणनीति के अनुरूप है।

परिणाम और भविष्य की दिशा

  • इस लेनदेन के पूरा होने के बाद, अडानी विल्मर का स्वामित्व पुनर्गठित हो जाएगा।
  • अडानी कमोडिटीज LLP के नामित निदेशक AWL के बोर्ड से इस्तीफा देंगे।
  • यह सौदा नियामक मंजूरी और अन्य शर्तों पर निर्भर है।

अडानी एंटरप्राइजेज का यह निर्णय उसके मुख्य व्यवसाय क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने और FMCG क्षेत्र से बाहर निकलने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।

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