झारखंड हाईकोर्ट ने कोल माइंस प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (CMPFO) के DHFL में निवेश किए गए ₹727.67 करोड़ डूबने के मामले में CBI जांच का आदेश दिया है। मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कोल एम्प्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन के संजीव कुमार श्रीवास्तव की 2022 में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया।
चेतावनी के बावजूद ₹1,300 करोड़ का निवेश
मामला DHFL में CMPFO के करीब ₹1,300 करोड़ के निवेश से जुड़ा है। DHFL के दिवालिया होने के बाद ₹727.67 करोड़ डूब गए। रिपोर्ट के अनुसार, CMPFO के फंड मैनेजर SBI और UTI ने 24 जून 2019 को ही DHFL की खराब वित्तीय स्थिति को लेकर रेड अलर्ट जारी किया था। इसके बावजूद तत्कालीन ट्रस्टियों ने समय रहते उचित कदम नहीं उठाए।
अधिकारियों को क्लीन चिट देने पर सवाल
DHFL के दिवालिया होने के करीब छह महीने बाद, 20 दिसंबर 2019 को निवेश की रकम वापस निकालने का प्रस्ताव पारित हुआ। 22 नवंबर 2021 को बोर्ड की उपसमिति ने ₹727.67 करोड़ को राइट ऑफ करने का प्रस्ताव रखा, जिसका कर्मचारियों ने विरोध किया।
इस मामले में तत्कालीन कोल सचिव अनिमेष भारती के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू हुई थी। लेकिन जांच रिपोर्ट आने से पहले ही CMPFO ने हलफनामा दाखिल कर अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी। हाईकोर्ट ने इस घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए CBI जांच के आदेश दिए।
