डोनाल्ड ट्रंप का फैसला: जन्मसिद्ध नागरिकता खत्म करने की योजना से नई बहस शुरू

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए प्रस्ताव ने अमेरिकी नागरिकता से जुड़े नियमों पर बड़ी बहस छेड़ दी है। ट्रंप ने हाल ही में घोषणा की है कि वे अवैध प्रवासियों और अस्थायी वीजा पर अमेरिका में रहने वाले माता-पिता के बच्चों को मिलने वाली जन्मसिद्ध नागरिकता खत्म करने की योजना बना रहे हैं। इस फैसले से न केवल आम नागरिक, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी हलचल मच गई है।

क्या है ट्रंप का प्रस्ताव?

डोनाल्ड ट्रंप का प्रस्ताव कहता है कि जो बच्चे अमेरिका में जन्मे हैं, लेकिन उनके माता-पिता अमेरिकी नागरिक या स्थायी निवासी नहीं हैं, उन्हें अब स्वतः अमेरिकी नागरिकता का अधिकार नहीं मिलेगा। यह नियम विशेष रूप से उन बच्चों पर लागू होगा जिनकी माताएं अवैध रूप से या अस्थायी वीजा पर अमेरिका में रह रही थीं।

क्यों बढ़ी जेडी वेंस की पत्नी की चिंता?

डोनाल्ड ट्रंप के इस प्रस्ताव ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की पत्नी उषा वेंस को भी चर्चा में ला दिया है। उषा भारतीय मूल की हैं, और उनके माता-पिता भारत के आंध्र प्रदेश से अमेरिका आए थे। सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या इस नियम से उषा की नागरिकता पर भी प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह नियम केवल आदेश की तारीख के 30 दिन बाद जन्मे बच्चों पर लागू होगा।

कौन हैं उषा वेंस?

उषा वेंस के माता-पिता, कृष और लक्ष्मी चिलुकुरी, 1980 के दशक में अमेरिका आए थे। कृष एयरोस्पेस इंजीनियर हैं और लक्ष्मी एक जीवविज्ञानी। उनका करियर शानदार रहा है और उन्होंने अपने क्षेत्र में काफी योगदान दिया है।

किसे होगा सबसे ज्यादा असर?

इस प्रस्ताव से H-1B, H-4 और F-1 वीजा पर रह रहे भारतीय प्रवासियों पर सबसे अधिक असर होगा। अमेरिका में लाखों भारतीय ऐसे हैं जो रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं। इन लोगों के बच्चों को अब स्वतः नागरिकता नहीं मिलेगी।

10 लाख से ज्यादा प्रवासियों पर असर

विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले का सीधा असर 10 लाख से अधिक भारतीय प्रवासियों पर पड़ेगा। इनमें से कई लोग दशकों से ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं।

क्या बदलेगा?

अगर यह प्रस्ताव कानून बनता है, तो अमेरिका के नागरिकता नियमों में एक ऐतिहासिक बदलाव होगा। यह न केवल अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन पर सवाल खड़े करेगा, बल्कि प्रवासी समुदायों के बीच असुरक्षा की भावना भी बढ़ाएगा।

डोनाल्ड ट्रंप के इस कदम से आने वाले समय में अमेरिकी राजनीति में और विवाद और बहस की संभावना है।

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