भारत के रिटेल रियल एस्टेट सेक्टर में इस समय जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। देश के प्रमुख शहरों में शॉपिंग मॉल और प्रीमियम रिटेल प्रॉपर्टीज की मांग बढ़ रही है। रिटेलर्स तेजी से स्टोर खोल रहे हैं और अच्छी लोकेशन वाले Grade-A और Grade-A+ मॉल में जगह की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ नए मॉल बनाने और दुकानों की संख्या बढ़ाने से यह तेजी लंबे समय तक कायम नहीं रह सकती।
आने वाले वर्षों में भारतीय मॉल बाजार की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि डेवलपर्स ग्राहकों को केवल खरीदारी की सुविधा देते हैं या उन्हें ऐसा अनुभव भी देते हैं, जिसके लिए वे बार-बार मॉल आना चाहें।
रिटेल लीजिंग में 45% की सालाना बढ़ोतरी
Cushman & Wakefield के आंकड़ों के मुताबिक सितंबर तिमाही में भारत के आठ प्रमुख शहरों में रिटेल लीजिंग करीब 2.41 मिलियन वर्गफुट रही। यह पिछली तिमाही की तुलना में 7.6% अधिक और पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले करीब 45% ज्यादा है।
इस बढ़ोतरी से संकेत मिलता है कि ब्रांड्स और रिटेलर्स भारत के संगठित रिटेल बाजार में विस्तार को लेकर काफी आशावादी हैं।
दिल्ली-NCR भी देश के प्रमुख रिटेल बाजारों में शामिल रहा। क्षेत्र में करीब 0.51 मिलियन वर्गफुट रिटेल स्पेस की लीजिंग हुई, जो पिछली तिमाही की तुलना में लगभग 70% ज्यादा थी। यहां फैशन, Food & Beverage और एंटरटेनमेंट से जुड़े कारोबारों ने मांग को मजबूत किया।
Grade-A+ मॉल में खाली जगह कम
प्रीमियम शॉपिंग मॉल की मांग का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि Grade-A+ मॉल में vacancy rate घटकर करीब 2.27% रह गया। इसका मतलब है कि उपलब्ध प्रीमियम स्पेस का बड़ा हिस्सा पहले ही किराए पर जा चुका है।
सितंबर तिमाही के दौरान बड़ी संख्या में नए मॉल बाजार में नहीं आए। ऐसे में मौजूदा प्रीमियम मॉल में उपलब्ध जगह सीमित रही और मांग मजबूत होने के कारण किराये पर भी दबाव बढ़ा।
NCR और मुंबई जैसे बाजारों में प्रीमियम रिटेल एसेट्स के किराये में तिमाही आधार पर लगभग 1-2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
सिर्फ Shopping नहीं, Experience बन रहे हैं नए मॉल
रिटेल रियल एस्टेट में सबसे बड़ा बदलाव ग्राहकों के व्यवहार में दिखाई दे रहा है। अब लोग केवल सामान खरीदने के लिए मॉल नहीं जाते। वे वहां खाना, मनोरंजन, दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताने तथा अलग तरह का अनुभव लेने भी पहुंचते हैं।
इसी वजह से डेवलपर्स मॉल के डिजाइन में Food Streets, Cafés, Entertainment Zones, Family Areas और Hospitality जैसी सुविधाओं को अधिक महत्व दे रहे हैं।
इस मॉडल का उद्देश्य ग्राहक को मॉल में ज्यादा समय तक रोकना और बार-बार वापस आने के लिए प्रेरित करना है। यानी भविष्य का सफल मॉल केवल दुकानों का समूह नहीं होगा, बल्कि एक ऐसा destination होगा जहां shopping के साथ entertainment, food और leisure भी उपलब्ध हों।
Fashion, F&B और Entertainment सबसे आगे
सितंबर तिमाही की रिटेल लीजिंग में तीन प्रमुख कैटेगरी का योगदान सबसे ज्यादा रहा।
- Fashion: करीब 21%
- Food & Beverage: करीब 19%
- Entertainment: करीब 16%
इन तीनों क्षेत्रों ने मिलकर कुल लीजिंग गतिविधि का आधे से अधिक हिस्सा बनाया।
यह आंकड़ा बताता है कि भारतीय उपभोक्ताओं की प्राथमिकताएं तेजी से बदल रही हैं। कपड़े और lifestyle products की खरीदारी के साथ-साथ लोग restaurants, cafés, entertainment और leisure activities पर भी खर्च कर रहे हैं।
क्या Mall Boom लंबे समय तक टिक पाएगा?
रिटेल बाजार में तेजी मजबूत जरूर है, लेकिन इसके सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। सबसे बड़ा जोखिम oversupply का है।
गुरुग्राम, पुणे और हैदराबाद जैसे बाजारों में 2026 के बाद कई नए मॉल और रिटेल प्रोजेक्ट्स के चालू होने की उम्मीद है। यदि बाजार में उपलब्ध रिटेल स्पेस मांग की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ता है, तो कुछ मॉल में vacancy बढ़ सकती है और किराये पर दबाव आ सकता है।
इसलिए डेवलपर्स के लिए केवल ज्यादा square footage तैयार करना पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें यह भी देखना होगा कि नए मॉल में पर्याप्त footfall, मजबूत tenant mix और बेहतर customer experience कैसे तैयार किया जाए।
बढ़ता किराया भी बन सकता है चुनौती
रिटेल प्रॉपर्टी के मालिकों के लिए किराये में बढ़ोतरी सकारात्मक संकेत है, लेकिन रिटेलर्स के लिए बढ़ती occupancy cost चुनौती बन सकती है।
यदि किराये में वृद्धि दुकानों की बिक्री और productivity की तुलना में बहुत ज्यादा होती है, तो retailers के profit margins पर दबाव आ सकता है।
इसलिए आने वाले समय में मॉल मालिकों और retailers के बीच ऐसा संतुलन जरूरी होगा, जिसमें किराया भी टिकाऊ रहे और दुकानों की sales productivity भी मजबूत बनी रहे।
पुराने Retail Markets में भी अवसर
रिटेल बाजार की अगली growth केवल नए शहरों या नए मॉल से नहीं आएगी। पुराने और fragmented retail markets को organized retail hubs में बदलने की भी बड़ी संभावना है।
विशेषज्ञों के मुताबिक पुराने गुरुग्राम जैसे इलाकों में organized retail infrastructure के विकास से नए अवसर पैदा हो सकते हैं। इसी तरह NCR के नए micro-markets भी retailers और brands का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
फरीदाबाद को भी तेजी से उभरते micro-markets में से एक माना जा रहा है, जहां investors और brands की दिलचस्पी बढ़ रही है।
अगले दशक में Quantity नहीं, Quality होगी महत्वपूर्ण
रिटेल रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दशक में केवल ज्यादा मॉल और ज्यादा दुकानें बनाना सफलता की गारंटी नहीं होगी।
कामयाब मॉल वही होंगे जहां:
- सही और आकर्षक tenant mix हो
- Fashion, F&B और Entertainment का बेहतर संतुलन हो
- ग्राहकों के लिए unique experiences उपलब्ध हों
- Technology का प्रभावी इस्तेमाल हो
- परिवार और युवाओं दोनों के लिए leisure options हों
- आसपास के residential और commercial क्षेत्रों से मजबूत connectivity हो
- ग्राहकों को बार-बार लौटने की वजह मिले
इस बदलाव का सीधा मतलब है कि भारतीय shopping malls धीरे-धीरे traditional shopping centres से experience-led destinations में बदल रहे हैं।
निष्कर्ष
भारत का retail real estate market फिलहाल मजबूत growth phase में दिखाई दे रहा है। रिटेल लीजिंग में तेज वृद्धि, Grade-A+ malls में कम vacancy और fashion, F&B तथा entertainment brands की बढ़ती मांग इस सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत हैं।
लेकिन इस तेजी को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए developers को oversupply से बचना होगा। साथ ही बढ़ते किराये को retailers की sales productivity के अनुरूप रखना जरूरी होगा।
भविष्य में भारत के retail real estate market की असली प्रतिस्पर्धा केवल इस बात पर नहीं होगी कि किस developer के पास सबसे बड़ा mall है, बल्कि इस बात पर होगी कि कौन सा mall ग्राहकों को सबसे बेहतर और अलग अनुभव दे सकता है।
यही कारण है कि आने वाले वर्षों में भारतीय shopping mall industry का मंत्र संभवतः “More Space” नहीं, बल्कि “Better Experience” होगा।
