गर्भावस्था में एंटीडिप्रेसेंट दवाओं से ऑिज्म का खतरा नहीं? बड़े अध्ययन में सामने आई राहत देने वाली रिपोर्ट

गर्भावस्था के दौरान एंटीडिप्रेसेंट दवाओं के इस्तेमाल को लेकर लंबे समय से चल रही चिंताओं के बीच एक बड़ी राहत देने वाली स्टडी सामने आई है। नए अंतरराष्ट्रीय शोध के अनुसार, प्रेग्नेंसी के दौरान एंटीडिप्रेसेंट दवाएं लेने से बच्चों में ऑटिज्म (Autism) या ADHD जैसे न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर का स्पष्ट खतरा नहीं बढ़ता।

यह अध्ययन 2.5 करोड़ से अधिक गर्भावस्थाओं के डेटा पर आधारित है और इसे अब तक की सबसे बड़ी रिसर्च में से एक माना जा रहा है। शोधकर्ताओं का कहना है कि पहले जो जोखिम दिखाई दे रहा था, वह दवाओं की वजह से नहीं बल्कि जेनेटिक्स, पारिवारिक मानसिक स्वास्थ्य और अन्य कारकों से जुड़ा हो सकता है।

क्या कहती है नई स्टडी?

यह रिसर्च प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल The Lancet Psychiatry में प्रकाशित हुई है। अध्ययन का नेतृत्व यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग के डॉ. विंग-चुंग चांग ने किया। शोधकर्ताओं ने 37 अलग-अलग अध्ययनों के डेटा का विश्लेषण किया, जिसमें लगभग 6.5 लाख ऐसी गर्भावस्थाएं शामिल थीं जहां महिलाओं ने एंटीडिप्रेसेंट दवाओं का उपयोग किया था।

शुरुआती विश्लेषण में बच्चों में ऑटिज्म और ADHD का थोड़ा बढ़ा हुआ जोखिम दिखाई दिया। लेकिन जब वैज्ञानिकों ने:

  • मां के मानसिक स्वास्थ्य
  • परिवार की मेडिकल हिस्ट्री
  • जेनेटिक फैक्टर्स
  • सामाजिक और पर्यावरणीय कारण

को ध्यान में रखा, तो यह संबंध काफी कमजोर या सांख्यिकीय रूप से महत्वहीन हो गया।

विशेषज्ञों ने क्या कहा?

स्टडी के प्रमुख लेखक डॉ. विंग-चुंग चांग के अनुसार:

“सामान्य एंटीडिप्रेसेंट दवाएं बच्चों में ऑटिज्म या ADHD का जोखिम नहीं बढ़ाती।”

वहीं यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स के प्रोफेसर जेम्स वॉकर ने कहा कि केवल तुलना के आधार पर निष्कर्ष निकालना गलत हो सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक यदि मां को डिप्रेशन है, तो उसका प्रभाव भी बच्चे के न्यूरोडेवलपमेंट पर पड़ सकता है। इसलिए केवल दवा को जिम्मेदार ठहराना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं माना जा सकता।

पिता की दवाओं में भी दिखा समान जोखिम

स्टडी में एक बेहद दिलचस्प तथ्य सामने आया। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन बच्चों के पिता एंटीडिप्रेसेंट दवाएं ले रहे थे, उनमें भी ऑटिज्म और ADHD का समान जोखिम देखा गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि पिता की दवा गर्भ में पल रहे बच्चे तक नहीं पहुंच सकती, इसलिए यह संकेत देता है कि जोखिम का संबंध पारिवारिक जेनेटिक्स और मानसिक स्वास्थ्य से ज्यादा हो सकता है।

अचानक दवा बंद करना खतरनाक हो सकता है

विशेषज्ञों ने गर्भवती महिलाओं को बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीडिप्रेसेंट दवाएं बंद न करने की चेतावनी दी है।

शोधकर्ताओं के अनुसार:

  • अचानक दवा बंद करने से मां का डिप्रेशन बढ़ सकता है
  • प्रीमैच्योर डिलीवरी का खतरा बढ़ सकता है
  • मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है
  • पोस्टपार्टम डिप्रेशन की संभावना बढ़ सकती है

किन मामलों में सावधानी जरूरी?

स्टडी में कुछ पुराने ट्राइसाइक्लिक एंटीडिप्रेसेंट्स जैसे:

  • Amitriptyline
  • Nortriptyline

के साथ थोड़ा बढ़ा हुआ जोखिम देखा गया। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ये दवाएं आमतौर पर गंभीर या जटिल मानसिक स्वास्थ्य मामलों में दी जाती हैं, इसलिए यहां भी जोखिम का कारण केवल दवा नहीं माना जा सकता।

हल्के डिप्रेशन में क्या हैं विकल्प?

विशेषज्ञों का कहना है कि हल्के डिप्रेशन के मामलों में:

  • Psychotherapy
  • Counseling
  • Meditation
  • Stress Management
  • Lifestyle Changes

जैसे non-pharmacological विकल्प बेहतर हो सकते हैं।

हालांकि मध्यम या गंभीर डिप्रेशन में डॉक्टर की निगरानी में दवा जारी रखना कई बार जरूरी माना जाता है।

पहले की स्टडीज क्यों थीं विवादित?

पिछले वर्षों में कुछ शोधों में एंटीडिप्रेसेंट दवाओं और ऑटिज्म के बीच संबंध बताए गए थे। लेकिन उन अध्ययनों में:

  • कम डेटा
  • सीमित सैंपल
  • Confounding Factors की कमी
  • जेनेटिक विश्लेषण का अभाव

जैसी सीमाएं थीं।

नई स्टडी को अधिक व्यापक और वैज्ञानिक रूप से मजबूत माना जा रहा है।

गर्भवती महिलाओं के लिए क्या सलाह?

विशेषज्ञों के अनुसार:

  • डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद न करें
  • मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज न करें
  • नियमित मेडिकल चेकअप कराएं
  • तनाव कम करने की कोशिश करें
  • किसी भी दवा के फायदे और जोखिम डॉक्टर से समझें

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मां का स्वस्थ मानसिक संतुलन बच्चे के विकास के लिए बेहद जरूरी होता है।

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