देश में डिजिटल गोल्ड को लेकर निवेशकों का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की बार-बार जारी की गई चेतावनियों के बावजूद वर्ष 2026 की पहली छमाही में डिजिटल गोल्ड की बिक्री में सालाना आधार पर तीन गुना से अधिक की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
डिजिटल गोल्ड फिलहाल किसी नियामकीय ढांचे के तहत पूरी तरह नियंत्रित नहीं है, फिर भी निवेशकों का रुझान इस निवेश विकल्प की ओर लगातार बढ़ता जा रहा है।
छह महीने में ₹17,630 करोड़ का डिजिटल गोल्ड खरीदा गया
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से जून 2026 के बीच यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के माध्यम से ₹17,630 करोड़ का डिजिटल गोल्ड खरीदा गया।
बताया गया है कि देश में डिजिटल गोल्ड की 90 प्रतिशत से अधिक खरीदारी UPI के जरिए ही की जाती है। UPI भारत की सबसे लोकप्रिय डिजिटल भुगतान प्रणाली बन चुकी है।
पूरे 2025 से भी आगे निकला 2026 का आंकड़ा
साल 2025 में पूरे वर्ष के दौरान डिजिटल गोल्ड की कुल बिक्री ₹14,550 करोड़ रही थी।
इसके मुकाबले 2026 के केवल पहले छह महीनों में ही बिक्री का आंकड़ा 21 प्रतिशत अधिक पहुंच गया, जो निवेशकों की बढ़ती रुचि को दर्शाता है।
शुरुआती तेजी के बाद मासिक बिक्री में आई गिरावट
वर्ष 2026 की शुरुआत में जनवरी महीने में डिजिटल गोल्ड की बिक्री करीब ₹4,000 करोड़ रही थी।
इसके बाद हर महीने बिक्री में कुछ गिरावट देखने को मिली और जून तक यह आंकड़ा घटकर लगभग ₹2,500 करोड़ रह गया।
हालांकि, कुल मिलाकर पहली छमाही का प्रदर्शन पिछले वर्ष की तुलना में काफी बेहतर रहा।
SEBI की चेतावनी का सीमित असर
नवंबर 2025 में SEBI ने निवेशकों को चेतावनी दी थी कि डिजिटल गोल्ड एक अनियमित (Unregulated) निवेश उत्पाद है और यह उसके नियामकीय दायरे में नहीं आता।
चेतावनी के बाद नवंबर में बिक्री में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन दिसंबर से निवेशकों की खरीदारी फिर तेजी से बढ़ने लगी।
इन प्लेटफॉर्म्स से होती है सबसे ज्यादा खरीदारी
देश में अधिकांश निवेशक निम्नलिखित डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म्स के जरिए डिजिटल गोल्ड खरीदते हैं:
- PhonePe
- Google Pay
- Paytm
- अन्य UPI आधारित भुगतान ऐप
इन प्लेटफॉर्म्स पर कुछ रुपये से भी डिजिटल गोल्ड खरीदने की सुविधा उपलब्ध है, जिससे छोटे निवेशकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
विशेषज्ञों ने निवेशकों को किया सतर्क
कई वित्तीय विशेषज्ञों ने निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।
उनका कहना है कि यदि डिजिटल गोल्ड बेचने वाला प्लेटफॉर्म भविष्य में बंद हो जाता है या किसी वित्तीय संकट का सामना करता है, तो निवेशकों के लिए अपनी रकम वापस प्राप्त करना मुश्किल हो सकता है।
आखिर क्यों बढ़ रही है डिजिटल गोल्ड की मांग?
विशेषज्ञों के अनुसार डिजिटल गोल्ड में निवेश बढ़ने के पीछे कई प्रमुख कारण हैं:
- सोने की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी
- वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की मांग
- ऑनलाइन खरीदारी की आसान प्रक्रिया
- कम राशि से निवेश शुरू करने की सुविधा
- UPI के जरिए तुरंत खरीदारी
SEBI ने क्या कहा?
SEBI के अनुसार, डिजिटल गोल्ड उत्पाद उसके द्वारा विनियमित गोल्ड निवेश उत्पादों से पूरी तरह अलग हैं।
नियामक का कहना है कि:
- डिजिटल गोल्ड को न तो सिक्योरिटी माना जाता है।
- न ही यह कमोडिटी डेरिवेटिव्स के तहत विनियमित होता है।
- इसलिए यह पूरी तरह SEBI के नियामकीय दायरे से बाहर संचालित होता है।
इसी वजह से निवेशकों को ऐसे उत्पादों में निवेश से पहले सभी जोखिमों को अच्छी तरह समझने की सलाह दी जाती है।
