त्योहारी सीजन से पहले केंद्र सरकार चीनी की संभावित जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट लागू करने पर विचार कर रही है। हाल के दिनों में चीनी की कीमतों में आई तेज़ बढ़ोतरी के बाद सरकार ने स्थिति पर गंभीरता से ध्यान देना शुरू कर दिया है। बाजार सूत्रों के अनुसार, त्योहारों के दौरान कृत्रिम कमी और कीमतों में अनावश्यक उछाल रोकने के लिए जल्द ही इस संबंध में फैसला लिया जा सकता है।
एक महीने में ₹300 प्रति क्विंटल महंगी हुई चीनी
पिछले एक महीने में चीनी की थोक कीमतों में करीब ₹300 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
वर्तमान में थोक बाजार में चीनी का भाव करीब ₹4,500 प्रति क्विंटल पहुंच गया है।
वहीं, मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में खुदरा बाजार में चीनी की कीमत ₹45 से ₹50 प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुकी है।
चीनी उद्योग ने कहा- पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध
हालांकि चीनी उद्योग का कहना है कि कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कोई वास्तविक आपूर्ति संकट नहीं है।
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) और नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड द्वारा जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि केंद्र सरकार के साथ हुई चर्चा में यह स्पष्ट हुआ है कि देश में घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी का स्टॉक उपलब्ध है।
उद्योग का दावा है कि फिलहाल चीनी की उपलब्धता सामान्य है और आपूर्ति को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।
कमजोर मानसून से बढ़ी उत्पादन की चिंता
विशेषज्ञों के अनुसार, अक्टूबर से शुरू होने वाले नए चीनी उत्पादन सीजन को लेकर चिंताओं ने बाजार में कीमतों को बढ़ावा दिया है।
जून महीने में देशभर में 37 प्रतिशत तक बारिश की कमी दर्ज की गई थी।
इसके अलावा देश के दो प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य:
- महाराष्ट्र
- उत्तर प्रदेश
में भी सामान्य से कम वर्षा हुई है, जिससे गन्ने की फसल और आगामी चीनी उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
हालांकि जुलाई में मानसून सक्रिय हुआ है, लेकिन कई क्षेत्रों में अब भी वर्षा का घाटा बना हुआ है।
जमाखोरी और घबराहट में खरीदारी का खतरा
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि व्यापारी और थोक कारोबारी बड़े पैमाने पर स्टॉक जमा करने लगते हैं, तो त्योहारों के दौरान बाजार में कृत्रिम कमी पैदा हो सकती है।
ऐसी स्थिति में खुदरा कीमतें और अधिक बढ़ सकती हैं तथा उपभोक्ताओं को महंगी चीनी खरीदनी पड़ सकती है।
इसी आशंका को देखते हुए सरकार स्टॉक लिमिट लागू करने जैसे कदमों पर विचार कर रही है, ताकि बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनी रहे और कीमतों को नियंत्रित रखा जा सके।
