साइबर फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए RBI ने Money Mule Accounts को लेकर नई ड्राफ्ट गाइडलाइंस प्रस्तावित की हैं। संदिग्ध खातों में जमा रकम की निकासी पर अस्थायी रोक लगाई जा सकेगी। यह ड्राफ्ट सुप्रीम कोर्ट के 4 अगस्त के आदेश के बाद तैयार किया गया है।
₹1,000+ संदिग्ध ट्रांजैक्शन पर नजर
बैंकों को AI और Machine Learning सिस्टम से ₹1,000 या उससे अधिक के संदिग्ध ट्रांजैक्शन फ्लैग करने होंगे। ग्राहक की सामान्य प्रोफाइल से अलग लेनदेन और पहले से फ्रॉड/Money Mule के रूप में रिपोर्ट हुए खातों से जुड़े ट्रांजैक्शन भी निगरानी में आएंगे।
ग्राहक को 20 दिन में देना होगा जवाब
संदिग्ध खाते पर तत्काल अस्थायी Debit Hold लगाया जा सकता है। ग्राहक को खाते में जमा रकम के स्रोत और लेनदेन पर 20 दिन में स्पष्टीकरण देना होगा। जवाब मिलने के 10 दिन के भीतर बैंक को फैसला करना होगा। जवाब नहीं मिलने पर 30 दिन के भीतर निर्णय लेना होगा।
अगर बैंक जवाब से संतुष्ट होता है तो Hold तुरंत हटाना होगा।
असंतोषजनक जवाब पर पुलिस को सूचना
अगर बैंक संतुष्ट नहीं होता, तो Hold जारी रखते हुए संबंधित पुलिस अधिकारी को National Cyber Crime Reporting Portal के जरिए सूचना देनी होगी। सक्षम एजेंसी से 30 दिन में आगे Hold रखने का निर्देश नहीं मिलने पर बैंक को 31वें दिन रोक हटानी होगी। ऐसी स्थिति में अस्थायी Debit Hold की अधिकतम अवधि 60 दिन होगी।
Account-Level Hold आखिरी विकल्प
RBI ने कहा है कि पूरे खाते पर Hold असाधारण परिस्थितियों में अंतिम उपाय के तौर पर इस्तेमाल होना चाहिए। बैंकों को साइबर फ्रॉड और Money Mule Accounts की पहचान के लिए टेक्नोलॉजी आधारित सिस्टम बनाना होगा और FIU-India में Suspicious Transaction Reports (STR) दाखिल करनी होंगी। रिपोर्ट नहीं करने पर KYC नियमों के उल्लंघन की कार्रवाई हो सकती है।
बैंकों को 10 साल तक रिकॉर्ड रखना होगा
Debit Hold से जुड़े मामलों का Centralized Record रखना होगा। इसमें ग्राहक और जांच एजेंसियों के साथ हुई बातचीत भी शामिल होगी। ये रिकॉर्ड खाता बंद होने के बाद कम से कम 10 साल तक सुरक्षित रखने होंगे। संबंधित ग्राहक के दूसरे सक्रिय खातों और बैंकिंग संबंधों की भी निगरानी करनी होगी।
शिकायतों के लिए नोडल अधिकारी
बैंकों को ग्राहकों की शिकायतों के लिए Nodal Officers नियुक्त करने होंगे। उनकी जानकारी वेबसाइट और शाखाओं पर देनी होगी और शिकायतों का समाधान 30 दिन के भीतर करना होगा।
बैंक अधिकारियों की मिलीभगत के दावों पर विवाद
साइबर फ्रॉड में बैंक अधिकारियों की कथित मिलीभगत और सिस्टम की कमजोरियों को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, ऐसे दावों को संबंधित जांच या कानूनी प्रक्रिया में साबित किया जाना बाकी है।
RBI ने बैंकों, हितधारकों और आम जनता से 2 अक्टूबर तक सुझाव/टिप्पणियां मांगी हैं। ड्राफ्ट में इन दिशानिर्देशों को 1 अप्रैल 2026 से लागू करने का प्रस्ताव रखा गया था।
