Russian Crude Oil for India:
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे भीषण युद्ध का सीधा असर अब वैश्विक तेल आपूर्ति पर दिखाई देने लगा है। हॉर्मुज़ स्ट्रेट में तेल टैंकरों की आवाजाही रुक जाने के कारण भारत सहित पूरी दुनिया में तेल संकट की आशंका बढ़ गई है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 40% कच्चा तेल इसी मार्ग से प्राप्त करता है, जो अब लगभग बंद जैसी स्थिति में है।
तेल संकट के समय रूस ने भारत को दी सप्लाई की गारंटी
यदि यह युद्ध लंबा चलता है तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। ऐसे मुश्किल समय में रूस एक बार फिर भारत के समर्थन में सामने आया है। रूस ने भारत को तेल आपूर्ति जारी रखने का आश्वासन दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय समुद्री सीमा के पास ही जहाजों में लगभग 9.5 मिलियन बैरल रूसी कच्चा तेल मौजूद है, जो अगले कुछ ही हफ्तों में भारत पहुंच सकता है।
भारत की 40% तेल जरूरत पूरी करने को तैयार रूस
भारतीय रिफाइनरियां रोजाना लगभग 5.6 मिलियन बैरल कच्चे तेल को प्रोसेस करती हैं। फिलहाल भारत के पास करीब 25 दिनों का तेल भंडार मौजूद है, लेकिन सरकार लंबी अवधि की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अन्य विकल्पों की भी तलाश कर रही है।
अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान के ठिकानों पर हमले के बाद समुद्री मार्ग जोखिम भरे हो गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, रूस भारत की कुल कच्चे तेल की जरूरत का करीब 40% हिस्सा पूरा करने के लिए तैयार है। हालांकि, रूस से तेल आयात बढ़ाने का अंतिम फैसला अमेरिका के साथ चल रही व्यापारिक वार्ताओं और भारत सरकार के मार्गदर्शन पर निर्भर करेगा।
अमेरिका से संबंध और रूस की पेशकश
गौरतलब है कि जनवरी महीने में भारत ने अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए रूस से कच्चे तेल का आयात घटाकर 1.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन कर दिया था। लेकिन फरवरी में यह हिस्सा फिर बढ़कर लगभग 30% हो गया।
अब रूस ने भारत की कुल जरूरत का 40% तक तेल सप्लाई करने की तैयारी दिखा दी है। हालांकि, रूस से आयात कितना बढ़ाया जाएगा, इसका अंतिम निर्णय भारत सरकार अमेरिका के साथ बातचीत और देश की ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लेगी।
भारत इस कठिन समय में अपनी ‘न्यूट्रल’ कूटनीतिक छवि बनाए रखते हुए यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि देश में आम जनता को तेल की कमी का सामना न करना पड़े।
