नई दिल्ली/तेहरान: वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ (Strait of Hormuz) को दोबारा पूरी तरह खोलने की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बड़ा असर देखने को मिला। कच्चे तेल की कीमतों में 10% से ज्यादा गिरावट दर्ज की गई, जबकि अमेरिका समेत दुनिया भर के शेयर बाजारों में तेज़ उछाल आया।
क्या है स्ट्रेट ऑफ होरमज़ और क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
स्ट्रेट ऑफ होरमज़ दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में से एक है। यह खाड़ी देशों से निकलने वाले तेल को दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचाने का मुख्य रास्ता है। अनुमान है कि दुनिया के समुद्री रास्ते से भेजे जाने वाले तेल का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है।
जब भी इस रास्ते पर तनाव बढ़ता है, तेल की कीमतें तेजी से बढ़ने लगती हैं और दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है।
तेल कीमतों में क्यों आई बड़ी गिरावट?
ईरान के विदेश मंत्री ने घोषणा की कि स्ट्रेट ऑफ होरमज़ अब व्यावसायिक जहाजों और तेल टैंकरों के लिए पूरी तरह खुला है। इसके बाद बाजार में सप्लाई संकट कम होने की उम्मीद बढ़ गई।
- अमेरिकी कच्चा तेल (WTI) कीमतों में करीब 10% गिरावट
- ब्रेंट क्रूड भी 9% से ज्यादा टूटा
- कीमतें एक महीने के निचले स्तर तक पहुंचीं
वॉल स्ट्रीट और शेयर बाजारों में जोरदार तेजी
तेल सस्ता होने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा और अमेरिका के शेयर बाजारों में तेजी देखने को मिली।
- Dow Jones में सैकड़ों अंकों की तेजी
- S&P 500 और Nasdaq भी मजबूत बढ़त के साथ बंद हुए
- एयरलाइन और ट्रैवल कंपनियों के शेयरों में उछाल आया क्योंकि ईंधन लागत घटने की उम्मीद है
भारत पर क्या असर पड़ेगा?
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत को कई फायदे हो सकते हैं:
संभावित फायदे:
- पेट्रोल-डीजल कीमतों पर दबाव कम होगा
- महंगाई दर में राहत मिल सकती है
- रुपये पर दबाव घट सकता है
- सरकार का आयात बिल कम हो सकता है
- एयरलाइन, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को फायदा मिलेगा
क्या संकट पूरी तरह खत्म हो गया?
हालांकि बाजारों ने राहत की सांस ली है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है। यदि तनाव फिर बढ़ता है या जहाजों की आवाजाही बाधित होती है तो तेल कीमतें दोबारा उछल सकती हैं।
निवेशकों के लिए संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तेल कीमतें लंबे समय तक नीचे रहती हैं तो:
- एविएशन कंपनियों को फायदा
- पेंट, केमिकल और टायर कंपनियों को राहत
- उभरते बाजारों में निवेश बढ़ सकता है
- ऊर्जा कंपनियों पर दबाव रह सकता है
ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होरमज़ खोलने से दुनिया को बड़ी राहत मिली है। तेल कीमतों में तेज गिरावट और शेयर बाजारों में तेजी से साफ है कि निवेशक इस कदम को सकारात्मक मान रहे हैं। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह खबर आर्थिक राहत लेकर आ सकती है। हालांकि आगे की स्थिति पूरी तरह क्षेत्रीय तनाव पर निर्भर करेगी।
