भारत में सोने की मांग पर इस साल बड़ा असर पड़ सकता है। World Gold Council यानी WGC की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, सरकार द्वारा सोने पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत किए जाने के बाद वर्ष 2026 में देश में गोल्ड डिमांड में 50 से 60 टन तक की गिरावट आ सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक यह गिरावट पिछले साल की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत तक हो सकती है। इसमें सोने के आभूषण, गोल्ड बार और गोल्ड कॉइन्स की संयुक्त मांग शामिल है।
आयात शुल्क में सबसे बड़ा उछाल
WGC ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सोने पर इम्पोर्ट ड्यूटी में यह अब तक का सबसे बड़ा इजाफा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ी हुई कीमतों के अलावा महंगाई, आय स्तर में बदलाव, मानसून और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी सोने की मांग को प्रभावित करेंगी।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सोने के आभूषणों की मांग अपेक्षाकृत स्थिर रहती है क्योंकि यह शादी-ब्याह और सामाजिक परंपराओं से जुड़ी होती है।
हालांकि निवेश के उद्देश्य से खरीदे जाने वाले गोल्ड बार और सिक्कों की मांग सरकारी नीतियों और इम्पोर्ट ड्यूटी में बदलाव से ज्यादा प्रभावित होती है।
बढ़ सकती है सोने की तस्करी
WGC ने चेतावनी दी है कि आयात शुल्क में भारी बढ़ोतरी का असर केवल अल्पकालिक नहीं बल्कि दीर्घकालिक भी हो सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर अवैध सप्लाई नेटवर्क और तस्करी का सिस्टम मजबूत हो गया, तो बाद में इसे रोकना बेहद मुश्किल हो सकता है।
विश्लेषण के मुताबिक, वर्ष 2013 में ड्यूटी बढ़ाए जाने के बाद अवैध सोने की आयात मात्रा करीब 10 टन से बढ़कर 70 टन तक पहुंच गई थी।
इसके बाद 2013 से 2019 के बीच अनधिकृत सोने की औसत तस्करी लगभग 34 टन प्रति तिमाही रही थी।
इसी तरह 2022 में आयात शुल्क बढ़ने के बाद भी गोल्ड स्मगलिंग में तेज उछाल दर्ज किया गया था।
निवेशकों और ज्वेलरी बाजार पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंची ड्यूटी के कारण आने वाले महीनों में ज्वेलरी कारोबार और निवेश मांग दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
हालांकि त्योहारों और शादी के सीजन में भारतीय बाजार में सोने की पारंपरिक मांग बनी रहने की उम्मीद जताई जा रही है।
वहीं दूसरी ओर, बढ़ती कीमतों और टैक्स के कारण ग्राहक हल्के वजन के आभूषणों की ओर रुख कर सकते हैं।
