AI ट्रेनिंग के लिए घरों की रिकॉर्डिंग पर विवाद, Pronto के पायलट प्रोजेक्ट से बढ़ीं प्राइवेसी चिंताएं

Pronto का एक नया AI पायलट प्रोजेक्ट विवादों में घिर गया है। कंपनी द्वारा घरों के अंदर सफाई और घरेलू कामों के दौरान रिकॉर्डिंग करने के प्रयोग ने प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, Pronto ने स्वीकार किया है कि वह कुछ चुनिंदा ग्राहकों के साथ “ऑप्ट-इन रिकॉर्डिंग फीचर” का परीक्षण कर रही थी। इस फीचर के तहत घरेलू कामों के दौरान छोटे कैमरों से वीडियो रिकॉर्ड किए जा रहे थे, जिनका उपयोग AI और रोबोटिक्स सिस्टम को ट्रेन करने के लिए किया जा सकता है।

IT मंत्रालय ने लिया संज्ञान

मामला बढ़ने के बाद Ministry of Electronics and Information Technology यानी IT मंत्रालय ने भी इस विवाद का संज्ञान लिया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय इस बात की जांच कर रहा है कि घरों के अंदर रिकॉर्ड किए गए डेटा का उपयोग AI ट्रेनिंग के लिए किस तरह किया जा रहा है और क्या यह भारत के डेटा प्रोटेक्शन नियमों के अनुरूप है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का मौजूदा डेटा प्राइवेसी फ्रेमवर्क AI आधारित रिकॉर्डिंग और घरेलू डेटा के उपयोग को लेकर अभी पूरी तरह तैयार नहीं है।

क्या था Pronto का पायलट प्रोजेक्ट?

रिपोर्ट के अनुसार, Pronto कुछ ग्राहकों को स्वेच्छा से रिकॉर्डिंग की अनुमति देने का विकल्प दे रहा था।

कंपनी का कहना है कि यह रिकॉर्डिंग “फिजिकल AI” सिस्टम विकसित करने के लिए की जा रही थी। इसमें बर्तन धोना, कपड़े तह करना और सफाई जैसे वास्तविक घरेलू कार्यों का डेटा इकट्ठा किया जा रहा था ताकि AI और रोबोटिक्स सिस्टम वास्तविक दुनिया के कार्यों को बेहतर ढंग से समझ सकें।

Pronto ने दावा किया कि यह फीचर केवल 0.1 प्रतिशत ग्राहकों तक सीमित था और रिकॉर्डिंग 48 घंटे बाद डिलीट कर दी जाती थी।

प्राइवेसी को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?

विशेषज्ञों का कहना है कि घर के अंदर रिकॉर्डिंग करना इंटरनेट पर डेटा ट्रैकिंग से कहीं अधिक संवेदनशील मामला है।

लोग पहले ही सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर डेटा शेयर करते हैं, लेकिन घर के अंदर की गतिविधियों का रिकॉर्ड होना अलग स्तर की निगरानी माना जा रहा है।

तकनीकी नीति विशेषज्ञ कामेश शेखर के अनुसार, सबसे बड़ी चिंता यह है कि AI सिस्टम एक बार डेटा से सीख लें तो उस जानकारी को पूरी तरह “अनलर्न” करना संभव नहीं होता।

अन्य कंपनियों ने बनाई दूरी

विवाद बढ़ने के बाद Urban Company और Snabbit जैसी कंपनियों ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वे ग्राहकों के घरों में रिकॉर्डिंग सिस्टम लागू नहीं कर रही हैं।

Urban Company के सह-संस्थापक अभिराज सिंह भाल ने कहा कि ग्राहक की प्राइवेसी उनके बिजनेस की सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल है।

AI इंडस्ट्री में बढ़ रही “रियल-वर्ल्ड डेटा” की मांग

विश्लेषकों का मानना है कि AI कंपनियां अब इंटरनेट डेटा से आगे बढ़कर “रियल-वर्ल्ड बिहेवियर डेटा” इकट्ठा करना चाहती हैं।

घरेलू कामों के वीडियो भविष्य में ऐसे रोबोट विकसित करने में मदद कर सकते हैं जो इंसानों की तरह सफाई या अन्य काम कर सकें। यही वजह है कि कई AI कंपनियां वास्तविक दुनिया के डेटा को बेहद मूल्यवान मान रही हैं।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि AI इनोवेशन और उपभोक्ता प्राइवेसी के बीच संतुलन बनाए रखना आने वाले समय में सबसे बड़ी चुनौती होगी।

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